बांग्लादेश: गंभीर रूप से घायल नेता की मौत, यूनुस ने की नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील

ढाका. बांग्लादेश में ‘जुलाई विद्रोह’ के एक प्रमुख नेता और इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की छह दिन तक अस्पताल में जीवन और मौत के बीच संघर्ष के बाद बृहस्पतिवार रात सिंगापुर में मौत हो गयी. पिछले सप्ताह अज्ञात बंदूकधारियों ने हादी के सिर में गोली मार दी थी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे. देश में जुलाई 2024 में आरक्षण नियमों में सुधार की मांग को लेकर छात्रों ने व्यापक आंदोलन छेड़ा था जिसे ‘जुलाई विद्रोह’ के नाम से जाना जाता है.

हादी देश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव में उम्मीदवार थे और पिछले सप्ताह ढाका के विजयनगर इलाके में चुनाव प्रचार शुरू करते समय नकाबपोश बंदूकधारियों ने उनके सिर में गोली मार दी थी. गोली मारे जाने के बाद हादी की हालत को ढाका के चिकित्सकों ने ”बेहद नाजुक” बताया था जिसके बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सोमवार को उन्हें बेहतर उपचार के लिए एयर एंबुलेंस से सिंगापुर भेजा था.

अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने बृहस्पतिवार रात को टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम संबोधन में हादी की मौत की पुष्टि की और उनके हत्यारों को पकड़ने के लिए त्वरित कार्रवाई का वादा किया. यूनुस ने कहा, ”आज मैं आपके समक्ष अत्यंत दुखद समाचार लेकर आया हूं. ‘जुलाई विद्रोह’ के निडर योद्धा और इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी अब हमारे बीच नहीं रहे.” यूनुस ने हादी के हत्यारों को पकड़ने के लिए त्वरित कार्रवाई का वादा किया और एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की.

उन्होंने इस वारदात में शामिल लोगों को जल्द से जल्द न्याय के कठघरे में लाने का संकल्प लिया और कहा, ”हत्यारों के प्रति कोई नरमी नहीं दिखाई जाएगी.” उन्होंने कहा, ”मैं सभी नागरिकों से अपील करता हूं – धैर्य और संयम बनाए रखें.” उन्होंने कहा, ”कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य संबंधित संगठनों को पेशेवर तरीके से जांच करने का अवसर दिया जाए.” यूनुस ने यह भी कहा कि राष्ट्र कानून राज कायम करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.

हादी की मौत की घोषणा के बाद ढाका विश्वविद्यालय परिसर के पास शाहबाग चौराहे पर सैकड़ों छात्र और लोग जमा हो गए और ”तुम कौन हो, मैं कौन हूं – हादी, हादी” जैसे नारे लगाए. ‘जातीय छात्र शक्ति’ नामक एक छात्र समूह ने ढाका विश्वविद्यालय परिसर में मातमी जुलूस निकाला और प्रदर्शन में शामिल होने के लिए शाहबाग की ओर मार्च किया.

पिछले साल के हिंसक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डि्क्रिरमिनेशन’ (एसएडी) के एक बड़े सहयोगी संगठन नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) ने भी छात्रों के साथ आंदोलन में हिस्सा लिया और भारत विरोधी नारे लगाते हुए आरोप लगाया कि हादी पर हमला करने के बाद हमलावर भारत भाग गए. उन्होंने अंतरिम सरकार से मांग की कि जब तक हमलावरों को वापस नहीं लाया जाता, तब तक भारतीय उच्चायोग को बंद रखा जाए.

एनसीपी के एक प्रमुख नेता सरजिस आलम ने कहा, ”जब तक भारत हादी भाई के हत्यारों को वापस नहीं कर देता, तब तक अंतरिम सरकार में बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायोग बंद रहेगा. अभी नहीं तो कभी नहीं. हम युद्ध में हैं!” छात्र शक्ति ने गृह मामलों के सलाहकार का पुतला फूंका और हादी के हत्यारों को गिरफ्तार करने में उनकी विफलता को लेकर उनके इस्तीफे की मांग की. प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने राजधानी के कारवां बाजार में शाहबाग चौराहे के पास स्थित बांग्ला समाचार पत्र ‘प्रोथोम आलो’ के कार्यालय और पास के ‘डेली स्टार’ अखबार के कार्यालयों पर हमला किया.

खबरों के अनुसार, उन्होंने कई मंजिलों में तोड़फोड़ की और भीड़ ने इमारत के सामने आग लगा दी. इस दौरान इमारत में पत्रकार और अखबार के कर्मचारी अंदर ही फंसे रहे. एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, ”रात लगभग 11 बजे सैकड़ों प्रदर्शनकारी ‘प्रोथोम आलो’ के कार्यालय पहुंचे और बाद में इमारत को घेर लिया.” उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने ‘प्रोथोम आलो’ की इमारत में तोड़फोड़ करने के बाद ‘डेली स्टार’ के कार्यालय में आग लगा दी.

इन दोनों अखबारों को यूनुस का अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करने के लिए जाना जाता है और अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों समाचार पत्रों पर हमला क्यों हुआ. सोशल मीडिया मंच पर प्रसारित वीडियो में प्रदर्शनकारियों का एक समूह बांग्लादेश के संस्थापक पिता शेख मुजीबुर रहमान के आवास ’32 धानमंडी’ की ओर बढ.ता हुआ दिख रहा है, जिसे दशकों तक बांग्लादेश के स्वतंत्रता-पूर्व स्वायत्तता संघर्ष का केंद्र बिंदु माना जाता है.

ट्रस्ट के तहत स्मारक संग्रहालय में परिर्वितत किए गए इस आवास को इस वर्ष पांच फरवरी को खुदाई में इस्तेमाल होने वाली मशीनों से काफी हद तक ध्वस्त कर दिया गया था, जबकि पांच अगस्त, 2024 को तत्कालीन अवामी लीग सरकार के पतन के बाद इसमें आग भी लगा दी गई थी. प्रदर्शनकारियों ने उत्तर पूर्व के बंदरगाह शहर चटगांव में पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल के घर को भी आग लगा दी, जबकि देश के अन्य हिस्सों से भी ऐसे हमलों की खबरें आईं.

अपने संबोधन में मुख्य सलाहकार ने स्पष्ट रूप से अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की भंग हो चुकी अवामी लीग का उल्लेख करते हुए हादी को ”पराजित ताकतों और फासीवादी आतंकवादियों का दुश्मन” बताया. उन्होंने कहा, ”क्रांतिकारियों को डराने के उनके नापाक प्रयास पूरी तरह विफल हो जाएंगे.” यूनुस ने कहा कि हादी की मृत्यु से देश की राजनीतिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपूरणीय क्षति हुई है.

उन्होंने कहा, ”मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं और उनकी शोक संतप्त पत्नी, परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और सहर्किमयों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं.” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हादी की पत्नी और उनके एक मात्र बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी लेगी.

उन्होंने कहा, ”धमकी, आतंकवादी गतिविधियों या खून खराबे के जरिए कोई भी इस देश की लोकतांत्रिक प्रगति को नहीं रोक सकता और हादी के सपने को साकार करने की जिम्मेदारी पूरे देश के कंधों पर है.” मंच ने इससे पहले चेतावनी दी थी कि हमलावरों की गिरफ्तारी तक वह शाहबाग चौराहे पर धरना देगा.

मंच ने कहा, ”अगर हत्यारा भारत भाग गया है, तो उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए और भारत की सरकार के साथ बातचीत के जरिए हर हाल में वापस लाया जाना चाहिए.” बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और उसकी प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी ने भी हादी की मौत पर शोक व्यक्त किया. इंकलाब मंच के नेता मोहम्मद अब्दुल आहद ने कहा कि हादी का शव शुक्रवार को घर लाया जाएगा. गृह मामलों के सलाहकार ने इससे पहले हादी पर हमला करने वाले संदिग्धों से संबंधित कोई भी सुराग बताने वाले को 50 लाख टका इनाम देने की घोषणा की थी. पुलिस ने मुख्य संदिग्ध फैसल करीम मसूद के माता-पिता, पत्नी और एक महिला मित्र को गिरफ्तार कर लिया है.

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