बांग्लादेश भारत से शेख हसीना को वापस लाने के लिए राजनयिक प्रयास जारी रखेगा: विदेश सलाहकार

ढाका. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने बुधवार को कहा कि वह भारत से अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस लाने के लिए राजनयिक प्रयास जारी रखेगी. उन्हें कई मामलों में दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई है. अवामी लीग की 78 वर्षीय नेता पिछले साल पांच अगस्त को व्यापक विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर बांग्लादेश से भागने के बाद से भारत में रह रही हैं.

सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस के अनुसार, बांग्लादेश के विदेशी मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा, ‘‘हम भारत को उन्हें ढाका वापस भेजने के लिए मनाने की कोशिश करेंगे.’’ तौहीद ने कहा कि हसीना की स्वदेश वापसी अंतत? भारत के निर्णय पर निर्भर करती है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि हसीना कुछ खास परिस्थिति में भारत आई थीं और मुझे लगता है कि वह परिस्थिति स्पष्ट रूप से इस बात का एक कारक है कि उनके साथ क्या हुआ था. लेकिन फिर भी, यह एक ऐसा फैसला है जिसे उन्हें खुद लेना होगा.
पूर्व प्रधानमंत्री के लिए किसी तीसरे देश में पुनर्वास की संभावना से संबंधित खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए तौहीद ने कहा कि उन्होंने इस तरह के दावे केवल मीडिया में देखे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे राजनयिक चैनलों के माध्यम से कोई जानकारी नहीं मिली है.’’ अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 17 नवंबर को पिछले साल जुलाई-अगस्त में हुए जन विद्रोह के दौरान किए गए ‘मानवता के विरुद्ध अपराधों’ के लिए हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को मौत की सजा सुनाई.

अदालत के फैसले के बाद बांग्लादेश ने भारत को पत्र भेजकर हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की. भारत ने कहा कि वह बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा हसीना के प्रत्यर्पण के अनुरोध की जांच कर रहा है और इस बात पर जोर दिया कि नयी दिल्ली उस देश (बांग्लादेश) के लोगों के सर्वोत्तम हितों को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

हसीना ने कहा है कि यह फैसला ‘एक गैर-चुनी हुई सरकार द्वारा स्थापित और संचालित एक धांधली वाले न्यायाधिकरण द्वारा दिया गया है, जिसे कोई लोकतांत्रिक जनादेश प्राप्त नहीं है.’ एक अन्य अदालत ने 27 नवंबर को हसीना को एक सरकारी आवास परियोजना के लिए भूमि आवंटन में अनियमितताओं से संबंधित भ्रष्टाचार के तीन मामलों में 21 साल जेल की सजा सुनाई. हसीना को एक दिसंबर को एक अन्य अदालत ने दोषी ठहराया और उन्हें पांच साल जेल की सजा सुनाई, जबकि उनकी भांजी (ब्रिटिश सांसद ट्यूलिप सिद्दीक) को भूमि घोटाले के मामले में दो साल जेल की सजा सुनाई गई.

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