गला घोंटकर हत्या करने का सिलसिला जारी, अब तक नौ महिलाओं ने गंवाई जान

बरेली. बरेली में गला घोंटकर महिलाओं की हत्या करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. जिले के शीशगढ़ थाना क्षेत्र में खेत से चारा लेकर लौट रही एक और महिला की कथित तौर पर साड़ी से गला घोंटकर हत्या कर दी गयी. पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी और कहा कि पांच महीने में महिलाओं की समान तरीके से हत्या करने की यह नौवीं घटना है.

बरेली जिले के शीशगढ़ और शाही आदि थाना क्षेत्रों में पांच माह के भीतर अधेड़ उम्र की महिलाओं की साड़ी और चुनरी से गला घोंटकर हत्या करने की एक के बाद एक करीब नौ घटनाएं सामने आयी हैं. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक ही प्रवृत्ति की कई घटनाओं को चुनौती के रूप में लेते हुए पुलिस निगरानी बढ़ा दी गई है और मामलों के राजफाश के लिए दो विशेष टीम का गठन किया गया है.

पुलिस ने बताया कि शीशगढ़ थाना क्षेत्र के जगदीशपुर गांव निवासी उर्मिला देवी गंगवार (55) रविवार दोपहर ढाई बजे घर से पशुओं का चारा लाने के लिए खेत गई थीं. काफी देर बाद भी जब वह घर नहीं लौटीं तो शाम के वक्त उर्मिला की तलाश शुरू की गयी. पुलिस ने बताया कि काफी देर तलाश के बाद गांव से 400 मीटर की दूरी पर एक खेत के करीब उनके पति वेद प्रकाश गंगवार को उर्मिला का शव मिला. पुलिस ने बताया कि महिला के गले में साड़ी का फंदा कसा हुआ था और उसकी जीभ बाहर निकली हुई थी तथा उसके सिर के पीछे चोट के निशान थे.

पुलिस ने सूचना मिलने के बाद विधिक कार्यवाही शुरू कर दी. पुलिस सूत्रों के अनुसार शीशगढ़ थाने के गांव लखीमपुर की महमूद कुल्चा गांव की धनवती, सेवा ज्वालापुर निवासी वीरावती, खजुरिया निवासी कुसमा देवी, शाही के मुबारकपुर गांव की शांति देवी, आनंदपुर की प्रेमवती, मीरगंज थाना क्षेत्र के गांव गुला की रेशमा देवी व शाही के गांव खरसेनी की दुलारी देवी की पांच महीने के भीतर जान जा चुकी है और इनमें से अधिकांश महिलाओं की मौत गला घोंटे जाने के कारण हुई थी.

बरेली परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) डॉक्टर राकेश सिंह ने पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लिया है. सिंह ने बताया कि सभी नौ घटनाओं में काफी समानताएं हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे में घटनास्थलों का निरीक्षण करने के साथ-साथ जिन-जिन गांवों में घटना हुई है, उसके साथ आस पास के ग्राम प्रधानों और संभ्रांत व्यक्तियों के साथ बैठक की जाएगी.

सिंह ने बताया कि दो विशेष टीम अलग-अलग गठित की गई हैं. एक टीम सीधे तौर पर काम करेगी, जबकि दूसरी टीम प्रधानों एवं संभ्रांत व्यक्तियों से मिले इनपुट के आधार पर काम करेगी. उन्होंने कहा कि गांव में सादे कपड़े में पुलिसर्किमयों की सक्रियता बढ़ाई जाएगी और इन घटनाओं को चुनौती के रूप में लिया गया है.

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