भाजपा ने नीतीश पर जनादेश के अपमान का आरोप लगाया; ‘पलटू राम’ बताया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 09 Aug 2022 09:44 PM
भाजपा ने नीतीश पर जनादेश के अपमान का आरोप लगाया; ‘पलटू राम’ बताया

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पटना/नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से हाथ मिलाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘‘अवसरवादी’’ करार देते हुए उन पर जनादेश का अपमान करने और बिहार की जनता को ‘‘धोखा’’ देने का आरोप लगाया.

भाजपा नेताओं ने कुमार को यह याद भी दिलाया कि उन्होंने 2017 में भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण राजद से संबंध तोड़ लिए थे, ऐसे में वह फिर उसी पार्टी से गठबंधन को कैसे न्यायोचित ठहराएंगे. भाजपा के नेताओं ने कुमार को ‘‘पलटू राम’’ कहकर हमला भी किया और उन दावों को खारिज किया कि उनकी पार्टी मुख्यमंत्री को कमतर आंक रही थी. कुमार को पहली बार राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने ‘‘पलटू राम’’ कहा था.

कभी मुख्यमंत्री कुमार के करीबी सहयोगी रहे आर सी पी ंिसह ने भी उन पर 2020 के विधानसभा चुनावों के जनादेश के अपमान का आरोप लगाया और कहा कि वह भाजपा-नीत राजग के पक्ष में था. भाजपा नेता गिरिराज ंिसह ने कहा कि वह भाजपा ही थी जिसने उन्हें 1996 में बड़ी पार्टी होने के बावजूद कुमार को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में स्वीकार किया था. उन्होंने कहा कि भाजपा ने 2020 विधानसभा चुनाव के बाद भी उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार किया जबकि भाजपा के विधायकों की संख्या जनता दल यूनाईटेड से अधिक थी.

ंिसह ने कहा कि कुमार, भाजपा के साथ तथाकथित समस्याओं को लेकर तमाम प्रकार के बहाने बना रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें परेशान होने की कोई वजह नहीं थी. उन्होंने कहा कि 2013 में भी उन्होंने प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा पाल रखी थी और वही महत्वाकांक्षा फिर उन्होंने पाल ली है. उन्होंने कहा कि राजद नेता तेजस्वी यादव उन्हें 2017 के चुनाव में ‘‘पलटू राम’’ कहकर पुकारते थे.

बिहार प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कुमार पर जनादेश को ‘‘धोखा’’देने का आरोप लगाया और दावा किया कि बिहार की जनता उन्हें इसकी सजा देगी. उन्होंने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि भाजपा को भी धोखा दिया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि यदि भाजपा के कारण जदयू को समस्या हो रही थी तो कुमार को इस बारे में 2020 में बोलना चाहिए था.

उन्होंने कहा कि कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट लेते हैं और सत्ता का आनंद लेने के लिए जनादेश का अपमान करते हैं.
उन्होंने सवाल किया, ‘‘वह भ्रष्टाचार की बात किया करते थे, क्या वह अब समाप्त हो गया है?’’ बिहार से भाजपा के सांसद विवेक ठाकुर ने कहा कि भाजपा को उनसे छुटकारा मिलना अच्छा है क्योंकि बिहार की सबसे वंचित जनता को मोदी पर विश्वास है और वह चाहती थी कि वह जदयू के साथ गठबंधन से अलग हो जाएं.

ठाकुर ने कहा कि कुमार पर ‘‘पलटू राम वन, पलटू राम टू और पलटू राम थ्री’’ नाम से वेब सीरिज बननी चाहिए. उन्होंने कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बनने की उनकी महत्वाकांक्षा हिलोरे मार रही है लेकिन इस पद के लिए कोई रिक्ति नहीं है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कुमार को ‘‘अवसरवादी’’ करार दिया और कहा कि बिहार को ‘‘धोखा’’ देने वाले उसके विकास की राह में रोड़े अटकाना चाहते हैं.

बिहार भाजपा की कोर ग्रुप की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पटना रवाना होने से पहले हवाईअड्डे पर एक समाचार चैनल से बातचीत में चौबे ने कहा, ‘‘भाजपा किसी को दबाती नहीं है और ना ही किसी को धोखा देती है. बिहार के साथ धोखा करने वाले उसके विकास की राह में रोड़े अटकाना चाहते हैं. अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर नरेंद्र मोदी तक की सरकार के दौरान हमारी प्रतिबद्धता बिहार के विकास की रही है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘कम सीटें जीतने के बावजूद हमने उन्हें (नीतीश को) मुख्यमंत्री बनाया. उन्होंने दूसरी बार बिहार की जनता के साथ धोखा किया है. उन्हें घमंड हो गया है.’’ राष्ट्रीय जनता दल के साथ बिहार में सरकार बनाने की नीतीश कुमार की पहल के बारे में पूछे जाने पर चौबे ने कहा, ‘‘विनाश काले, विपरीत बुद्धि.’’ उन्होंने कहा, ‘‘भ्रष्टाचार कतई बर्दाश्त ना करने का उनका दावा कहां गया? वह अवसरवादी हैं, अवसरों की तलाश में रहते हैं. यह मेरा निजी विचार है.’’ नीतीश कुमार ने मंगलवार को राज्यपाल फागू चौहान से मुलाकात की और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने राजद, कांग्रेस और भाकपा माले सहित अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.

बिहार में जदयू के गठबंधन से बाहर निकलने के बाद भाजपा विकल्पों पर कर रही है विचार

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के बाहर होने और बिहार की राजनीति में अचानक से बदले घटनाक्रमों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई नेताओं को चौंका दिया. हालांकि, भाजपा नेतृत्व कई मुद्दों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की असहजता से अवगत था.

भाजपा के कई वरिष्ठ नेता सोमवार तक यही समझ रहे थे कि जदयू की ओर से अस्थिरता का माहौल बनाकर एक राजनीति के तहत बयानबाजी की जा रही थी ताकि गठबंधन के बड़े सहयोगी को दबाव में रखा जा सके. इसके बावजूद भाजपा नेता यह मान रहे थे कि गेंद पूरी तरह जदयू के पाले में है और नीतीश कुमार एक सहयोगी को छोड़कर दूसरे सहयोगी के पाले में जाते रहे हैं. उनका मानना था कि राज्य का मुख्यमंत्री बने रहने के लिए वैसे भी कुमार 2014 के बाद दो बार ऐसा कर चुके हैं.

बहरहाल, भाजपा के नेता राजग से अलग होने की औपचारिक घोषणा के बाद जदयू के आरोपों का जवाब देंगे और अपनी भावी रणनीति को लेकर चर्चा करेंगे. भाजपा और जदयू के बीच, पिछले कुछ समय से बढ़ रही दूरियों के मद्देनजर भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को कई मौकों पर पटना भी भेजा ताकि संकट को दूर किया जा सके.

हाल ही में पटना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि अगले लोकसभा चुनाव में जदयू के साथ गठबंधन बना रहेगा और वह अगले विधानसभा चुनाव में भी साथ लड़ेंगे. इसके बाद भाजपा नेताओं को उम्मीद थी कि हालात सुधरेंगे. हालांकि कई मुद्दों पर अपने सहयोगी से पहले से ही नाराज चल रहे जदयू ने इसे भाजपा का प्रभुत्व बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा.

बिहार के सूत्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री कुमार आठ सालों में दूसरी बार भाजपा से अलग हुए हैं और वह राज्यपाल फागू चौहान से मिलकर इस्तीफा दे चुके है. इससे पहले जदयू के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने एक ट्वीट में स्पष्ट संकेत दिया कि कुमार जल्द ही इस्तीफा देंगे और राष्ट्रीय जनता दल के साथ के मिलकर नयी सरकार बनाएंगे. उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘‘नये स्वरूप में नये गठबंधन के नेतृत्व की जवाबदेही के लिए श्री नीतीश कुमार जी को बधाई. नीतीश जी आगे बढ़िए. देश आपका इंतजार कर कर रहा है.’’

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