
वाशिंगटन. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने टेक्सास में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय राजनीति में प्रेम, सम्मान और विनम्रता का अभाव है. उन्होंने साथ ही आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) चाहते हैं कि महिलाएं घर पर ही रहें. राहुल ने लोकसभा में विपक्ष का नेता बनने के बाद भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ अपने पहले संवाद के दौरान डलास में रविवार को ये टिप्पणियां कीं. गांधी ने एक अन्य कार्यक्रम में कहा कि महिलाओं के प्रति भारतीय पुरुषों के रवैये में बदलाव की जरूरत है.
गांधी (54) ने कहा कि वह महिला आरक्षण विधेयक समेत राजनीति में महिलाओं की भागीदारी के समर्थक हैं. गांधी ने कहा कि अगर महिलाएं कोई व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं तो उन्हें आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए और उनके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए, जैसा पुरुषों के साथ किया जाता है.
कांग्रेस नेता ने कहा, ”भाजपा और आरएसएस का मानना है कि महिलाओं को एक खास भूमिका तक ही सीमित रखा जाना चाहिए. उन्हें घर पर रहना चाहिए, उन्हें खाना बनाना चाहिए, उन्हें ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए और हमारा मानना ??है कि महिलाओं को वह सब करना चाहिए जो वे करना चाहती हैं.” उन्होंने भारतीय अमेरिकी समुदाय को संबोधित करते हुए कहा, ”आरएसएस मानता है कि भारत एक विचार है. हम मानते हैं कि भारत विचारों की विविधता वाला देश है.”
उन्होंने कहा, ”अमेरिका की तरह हमारा भी मानना है कि हर किसी को भागीदारी की अनुमति दी जानी चाहिए. हम मानते हैं कि हर किसी को सपने देखने का हक होना चाहिए और जाति, भाषा, धर्म, परंपरा, इतिहास की परवाह किए बगैर हर किसी को अवसर मिलना चाहिए.” राहुल ने कहा, ”यही लड़ाई है. चुनाव में यह लड़ाई तब चरम पर पहुंच गयी जब भारत में लाखों लोगों को साफ समझ आ गया कि भारत के प्रधानमंत्री देश के संविधान पर हमला कर रहे हैं. मैं आपसे कह रहा हूं कि (भारत) राज्यों का एक संघ है, वहां भाषाओं का सम्मान होता है, धर्मों का सम्मान होता है, परंपराओं का सम्मान होता है, जातियों का सम्मान होता है. यह सब संविधान में है.” कांग्रेस नेता ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी भूमिका भारतीय राजनीति में प्रेम, सम्मान और विनम्रता के मूल्यों को स्थापित करने की है.
उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि हमारी राजनीतिक प्रणालियों और दलों में जिस चीज का अभाव है, वह प्रेम, सम्मान और विनम्रता है. सभी मनुष्यों से प्रेम हो, जरूरी नहीं कि केवल एक धर्म, एक समुदाय, एक जाति, एक राज्य या एक भाषा बोलने वाले लोगों से ही प्रेम हो.” राहुल ने कहा, ”हर उस व्यक्ति का सम्मान होना चाहिए जो भारत का निर्माण करने का प्रयास कर रहा है, न केवल सबसे शक्तिशाली बल्कि सबसे कमजोर व्यक्ति का सम्मान होना चाहिए और विनम्रता केवल दूसरों में नहीं, बल्कि स्वयं में होनी चाहिए.
मुझे लगता है कि मैं अपने आप को इसी तरह देखता हूं.” राहुल ने लोकसभा चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अपने दम पर बहुमत हासिल करने में नाकाम रहने के परोक्ष संदर्भ में कहा, ”लोग कह रहे थे कि भाजपा हमारी परंपरा पर हमला कर रही है, हमारी भाषा आदि पर हमला कर रही है. उन्हें समझ आ गया कि जो भी भारत के संविधान पर हमला कर रहा है, वह हमारी धार्मिक परंपरा पर भी हमला कर रहा है.”
उन्होंने कहा, ”हमने देखा कि चुनाव नतीजे आने के कुछ मिनटों के भीतर भारत में कोई भी भाजपा, प्रधानमंत्री से डर नहीं रहा था. ये बड़ी उपलब्धियां हैं. ये भारत के लोगों की बड़ी उपलब्धियां हैं जिन्होंने लोकतंत्र को महसूस किया, जिन्होंने महसूस किया कि हम अपने संविधान पर हमले को स्वीकार नहीं करेंगे. हम अपने धर्म पर हमले को स्वीकार नहीं करेंगे. हम अपने राज्यों पर हमले को स्वीकार नहीं करेंगे.” राहुल ने कहा कि अमेरिका को भारत की जरूरत है और इसी तरह भारत को अमेरिका की जरूरत है. उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासी समुदाय दोनों देशों के बीच एक ”सेतु” है.
उन्होंने कहा, ”मेरी राय में आपको इन दो घरों के बीच स्वतंत्र रूप से यात्रा करनी चाहिए. आपको भारत का विचार अमेरिका में लाना चाहिए और अमेरिका के विचार भारत में लाने चाहिए.” कांग्रेस नेता ने कहा, ”आपकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि इन दोनों संघों के बीच के रिश्ते दोनों के भविष्य का निर्धारण करने वाले हैं.”
भारतीय राजनीति में प्रेम, सम्मान और विनम्रता का अभाव है : राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने टेक्सास में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय राजनीति में प्रेम, सम्मान और विनम्रता का अभाव है और उन्होंने यह मानने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भी आलोचना की कि भारत ”एक विचार” है. राहुल ने लोकसभा में विपक्ष का नेता बनने के बाद भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ अपने पहले संवाद के दौरान डलास में रविवार को ये टिप्पणियां कीं.
उन्होंने कहा, ”आरएसएस मानता है कि भारत एक विचार है. हम मानते हैं कि भारत विचारों की विविधता वाला देश है.” उन्होंने कहा, ”अमेरिका की तरह हमारा भी मानना है कि हर किसी को भागीदारी की अनुमति दी जानी चाहिए. हम मानते हैं कि हर किसी को सपने देखने का हक होना चाहिए और जाति, भाषा, धर्म, परंपरा, इतिहास की परवाह किए बगैर हर किसी को अवसर मिलना चाहिए.” राहुल ने कहा, ”यही लड़ाई है. चुनाव में यह लड़ाई तब चरम पर पहुंच गयी जब भारत में लाखों लोगों को साफ समझ आ गया कि भारत के प्रधानमंत्री देश के संविधान पर हमला कर रहे हैं. मैं आपसे कह रहा हूं कि (भारत) एक राज्यों का संघ है, वहां भाषाओं का सम्मान है, धर्मों का सम्मान है, परंपराओं का सम्मान है, जाति का सम्मान है. यह सब संविधान में है.” कांग्रेस नेता ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी भूमिका भारतीय राजनीति में प्रेम, सम्मान और विनम्रता के मूल्यों को स्थापित करने की है.
भारत में कौशल वाले लोगों को दरकिनार किया जा रहा है : राहुल गांधी
अमेरिका के टेक्सास राज्य के डलास में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि भारत में कौशल वाले लाखों लोगों को दरकिनार किया जा रहा है. उन्होंने महाभारत के एकलव्य की पौराणिक कथा का जिक्र भी किया जिसने अपने गुरु के कहने पर अपना अंगूठा काटकर उन्हें दे दिया था. लोकसभा में विपक्ष के नेता ने रविवार को डलास में टेक्सास विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान कहा कि भारत में कौशल की कोई कमी नहीं है बल्कि वहां कौशल रखने वाले लोगों के लिए सम्मान नहीं है.
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कांग्रेस के आधिकारिक अकाउंट पर राहुल गांधी के हवाले से पोस्ट किया गया, ”क्या आपने एकलव्य की कहानी सुनी है? भारत में जो कुछ हो रहा है, अगर आप इसे समझना चाहते हैं तो यहां लाखों, करोड़ों एकलव्य की कहानियां आए दिन सामने आ रही हैं. कौशल वाले लोगों को दरकिनार किया जा रहा है, उन्हें काम करने या आगे बढ.ने नहीं दिया जा रहा है और यह हर जगह हो रहा है.” महाभारत में युद्ध लड़ने की कला में निपुण गुरु द्रोणाचार्य से जब आदिवासी समुदाय से आने वाले एकलव्य ने धनुर्वद्यिा सीखने की इच्छा प्रकट की तो उन्होंने उससे उसका दाहिना अंगूठा मांग लिया.
गांधी ने कहा, ”कई लोग कहते हैं कि भारत में कौशल की समस्या है. मुझे नहीं लगता कि भारत में कौशल की कोई समस्या है. मुझे लगता है कि… भारत में कौशल रखने वाले लोगों के लिए सम्मान नहीं है.” अपने संबोधन में गांधी ने कहा कि कौशल का सम्मान करके तथा कुशल लोगों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर भारत की क्षमता को उभारा जा सकता है.
उन्होंने कहा, ”आप सिर्फ आबादी के एक-दो प्रतिशत लोगों को सशक्त बनाकर भारत की क्षमता में इजाफा नहीं कर सकते हैं.” गांधी अमेरिका की चार दिवसीय अनौपचारिक यात्रा पर हैं. इस दौरान वह डलास, टेक्सास और वाशिंगटन की यात्रा करेंगे और भारतीय मूल के लोगों एवं युवाओं से बातचीत करेंगे. सोमवार से शुरू होने वाली वाशिंगटन की अपनी यात्रा के दौरान उनकी अमेरिका के सांसदों और वहां की सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने की भी योजना है.
गांधी ने भारत में उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किए जाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा है कि वैश्विक उत्पादन में चीन का प्रभुत्व है इसलिए वह बेरोजगारी का सामना नहीं कर रहा है जबकि भारत और अमेरिका समेत पश्चिमी देश बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश, अमेरिका, यूरोप और भारत ने ”उत्पादन के विचार को छोड़ दिया है” और उन्होंने इसे चीन को सौंप दिया है.
गांधी ने कहा, ”उत्पादन का कार्य रोजगार पैदा करता है. हम जो करते हैं, अमेरिकी जो करते हैं, पश्चिमी देश जो करते हैं, वह है उपभोग को व्यवस्थित करना… भारत को उत्पादन के कार्य और उत्पादन को व्यवस्थित करने के बारे में सोचना होगा….” गांधी ने कहा, ”यह स्वीकार्य नहीं है कि भारत केवल यह कहे कि ठीक है, विनिर्माण, जिसे आप विनिर्माण या उत्पादन कहते हैं, वह चीनियों के लिए आरक्षित रहेगा. यह वियतनामियों के लिए आरक्षित रहेगा. यह बांग्लादेश के लिए आरक्षित रहेगा.” उन्होंने कहा, ”बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देने का एकमात्र तरीका यह हे कि विनिर्माण शुरू किया जाए.” उन्होंने कहा, ”जब तक हम ऐसा नहीं करेंगे, हमें बड़े पैमाने पर बेरोजगारी का सामना करना पड़ेगा और स्पष्ट रूप से यह टिकाऊ नहीं है.”
उन्होंने कहा, ”अगर हम ऐसे ही विनिर्माण को भूलने के इस रास्ते पर चलते रहेंगे, तो आप भारत, अमेरिका और यूरोप में भारी सामाजिक समस्याओं को देखेंगे. हमारी राजनीति का ध्रुवीकरण इसी वजह से है….” उन्होंने शिक्षा प्रणाली पर ”वैचारिक कब्जे” का जिक्र करते हुए व्यावसायिक प्रशिक्षण को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि व्यापार प्रणाली और शिक्षा प्रणाली के बीच की खाई को पाटा जा सके.



