भड़काऊ भाषण देने की वजह से भाजपा नफरती भाषण संबंधी विधेयक का विरोध कर रही: सिद्धरमैया

तेलंगाना: भाजपा ने कांग्रेस सरकार के प्रस्तावित नफरती भाषण रोधी विधेयक का विरोध किया

मैसूरु/हैदराबाद. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सोमवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य विधानसभा द्वारा पारित नफरती भाषण संबंधी विधेयक का विरोध कर रही है, क्योंकि वह कथित तौर पर घृणास्पद और भड़काऊ भाषण देने में शामिल है. उन्होंने कहा कि सरकार ने समाज में शांति और भाईचारा बनाए रखने और नफरत भरे भाषणों पर रोक लगाने के लिए कर्नाटक नफरती भाषण और घृणा अपराध (रोकथाम) विधेयक पेश किया है.

यह विधेयक भाजपा और जनता दल (एस) के कड़े विरोध के बावजूद, बेलगावी में 19 दिसंबर को समाप्त हुए शीतकालीन सत्र के दौरान राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा पारित कर दिया गया. अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, ताकि यह विधेयक कानून बन सके. भाजपा ने इस विधेयक को “दमनकारी”, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला” और “राजनीतिक प्रतिशोध के लिए खतरनाक हथियार” करार देते हुए कर्नाटक के राज्यपाल को पत्र लिखकर विधेयक को मंजूरी न देने का अनुरोध किया है.

सिद्धरमैया ने एक सवाल के जवाब में पत्रकारों से कहा, “इस विधेयक का विरोध केवल वही लोग करेंगे, जो नफरत फैलाने वाले और भड़काऊ भाषण देते हैं. अगर आप ऐसे भाषण नहीं देंगे, तो कोई आपके खिलाफ आपराधिक मामला क्यों दर्ज करेगा?” जब उनसे पूछा गया कि भाजपा क्यों चिंतित है, तो उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून सभी पर लागू होता है, चाहे वे कांग्रेस, भाजपा, जनता दल(एस) या किसी अन्य पार्टी से हों.

उन्होंने कहा, “आप (भाजपा) इसका विरोध क्यों कर रहे हैं? क्या समाज में नफरत भरे भाषणों से शांति बनी रहेगी? समाज में शांति और भाईचारा बनाए रखने के लिए यह विधेयक लाया गया है. हाल के दिनों में नफरत भरे भाषणों में वृद्धि हुई है, इसलिए इन्हें रोकने के लिए हमने यह कदम उठाया है.” जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि भाजपा इस विधेयक का विरोध क्यों कर रही है, तो उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि वे भड़काऊ भाषण दे रहे हैं.” इस विधेयक में घृणा अपराध के लिए एक वर्ष की कैद की सजा का प्रस्ताव है, जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, साथ ही 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा. बार-बार अपराध करने पर अधिकतम सात वर्ष की कैद और एक लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है.

तेलंगाना: भाजपा ने कांग्रेस सरकार के प्रस्तावित नफरती भाषण रोधी विधेयक का विरोध किया

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने राज्य की कांग्रेस सरकार द्वारा प्रस्तावित नफरती भाषण विरोधी विधेयक का विरोध करते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि इस तरह की टिप्पणियां कांग्रेस के नेता ही करते हैं, जिनमें ”हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ की गई टिप्पणियां” भी शामिल हैं.

रामचंद्र राव ने आरोप लगाया कि यह विधेयक केवल भाजपा के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने और राज्य में भाजपा को दबाने के लिए लाया जा रहा है. उन्होंने हाल में जुबली हिल्स उपचुनाव के दौरान मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी द्वारा की गई ”कांग्रेस का मतलब मुसलमान और मुसलमान का मतलब कांग्रेस” संबंधी टिप्पणी का हवाला देते हुए सवाल किया कि क्या इस तरह की टिप्पणियां घृणा फैलाने वाले भाषण की श्रेणी में नहीं आतीं.

उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, ”कांग्रेस सरकार घृणा फैलाने वाले भाषण के खिलाफ विधेयक लाने की कोशिश कर रही है. यह कर्नाटक में लाए गए विधेयक जैसा ही है. कांग्रेस शासित कर्नाटक के घृणा भाषण रोधी विधेयक का मसौदा दर्शाता है कि यह विधेयक केवल भाजपा के कार्यकर्ताओं को परेशान करने और पार्टी के नेताओं को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है.” राव ने कहा कि भाजपा घृणा फैलाने वाले भाषण के खिलाफ कानून बनाने के कांग्रेस सरकार के हर कदम का विरोध करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ टिप्पणियां करते हैं.

उन्होंने कहा, ”वे (कांग्रेस) घृणा भाषण विरोधी विधेयक केवल भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने और उन पर हमला करने के लिए ला रहे हैं. भाजपा को दबाने के लिए यह विधेयक लाया जा रहा है.” मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 20 दिसंबर को कहा था कि राज्य सरकार घृणा फैलाने वाले भाषणों के खिलाफ जल्द ही कानून बनाएगी.

भारत राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव के पिछले दो वर्षों से सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने के बाद रविवार को एक बैठक में हिस्सा लेने और संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करने के सवाल पर भाजपा नेता ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की इन गतिविधियों से तेलंगाना की राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा, ”यह एक ओटीपी की तरह है. ‘वन टाइम पासवर्ड’ (एक बार आने वाला पासवर्ड) आता है और लोग उसे भूल जाते हैं. कुछ समय बाद फिर एक और ओटीपी आ जाता है. लोग बीआरएस को भूल चुके हैं. लोगों को याद है कि बीआरएस भ्रष्टाचार में किस तरह शामिल रही है.”

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