धमतरी. छत्तीसगढ़ व्यापम द्वारा 20 सितंबर को आयोजित लैब असिस्टेंट भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में लोकोक्ति चयन से संबंधित एक प्रश्न के विकल्प में सेन समाज से जुड़ी मानी जा रही जातिसूचक लोकोक्ति को शामिल किए जाने को लेकर सर्व सेन समाज जिला धमतरी ने आपत्ति दर्ज कराई है।
छत्तीसगढ़ प्रांत नाई सेन समाज के निर्देश पर समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर श्रीमती इंदिरा सिंह को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और व्यापम से आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष धनसिंह सेन, संरक्षक मोहित सेन, सचिव भगवानी राम शांडिल्य, प्रांत प्रतिनिधि रामगोपाल सेन, सेलून एसोसिएशन के प्रांत उपाध्यक्ष कमल नारायण शांडिल्य, गोलू सेन, बसंत सेन, डेरहा राम सेन सहित समाज के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
समाज ने ज्ञापन में कहा कि प्रश्नपत्र में शामिल उक्त लोकोक्ति को सेन समाज अपने पारंपरिक व्यवसाय एवं सामाजिक पहचान से जोड़कर देखता है। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्र में इसे विकल्प के रूप में शामिल किए जाने से समाज के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। समाज का कहना है कि सामान्य ज्ञान अथवा भाषा संबंधी प्रश्नों में उदाहरण के लिए अन्य अनेक लोकोक्तियों का चयन किया जा सकता था।
*प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल*
सेन समाज ने व्यापम की प्रश्नपत्र निर्माण एवं अनुमोदन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में कहा गया कि प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षण और अंतिम अनुमोदन के बाद ही उसे मुद्रित कर परीक्षा में वितरित किया जाता है। ऐसे में उक्त लोकोक्ति को शामिल करने से पहले उसके सामाजिक प्रभाव पर विचार क्यों नहीं किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए।
समाज ने कहा कि सेन समाज की पहचान केवल पारंपरिक केश-कला अथवा किसी एक व्यवसाय तक सीमित नहीं है। समाज के लोग शिक्षा, प्रशासन, चिकित्सा, व्यापार, राजनीति, कला और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। इसलिए शासकीय प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करते समय ऐसी अभिव्यक्तियों के चयन में संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए, जिनसे किसी समाज की गरिमा या भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
*छह प्रमुख मांगें रखीं*
ज्ञापन में प्रश्नपत्र में उक्त लोकोक्ति को शामिल किए जाने की निष्पक्ष जांच, प्रश्नपत्र तैयार एवं अनुमोदित करने वाले अधिकारियों और विशेषज्ञों की भूमिका की जांच तथा व्यापम से आधिकारिक स्पष्टीकरण की मांग की गई है। साथ ही, यदि जांच में प्रश्न अथवा विकल्प आपत्तिजनक या नियमों के विपरीत पाया जाता है तो अभ्यर्थियों के हित में उचित सुधारात्मक निर्णय लेने की मांग की गई।
भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में किसी जाति, समाज अथवा समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली भाषा या उदाहरणों के चयन से बचने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी समाज ने की है।
ज्ञापन में पूर्व में ऐसे मामलों में “नाउ” शब्द के स्थान पर जाति-संबोधन के लिए “नाई” शब्द के प्रयोग किए जाने का उल्लेख करते हुए वर्तमान मामले में भी शासन से संवेदनशीलता के साथ उचित संज्ञान लेने की अपेक्षा की गई है।
समाज ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा संस्था को अपमानित करना नहीं, बल्कि सेन समाज की गरिमा, सम्मान और सामाजिक भावनाओं की रक्षा करना है।