नयी दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने महिला पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न मामले में मंगलवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के निवर्तमान प्रमुख और भारतीय जनता पार्टी सांसद बृजभूषण शरण सिंह को दो दिन की अंतरिम जमानत दे दी. अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटिन मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह ने सिंह को 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर राहत दी.
अदालत ने मामले में डब्ल्यूएफआई के निलंबित सहायक सचिव विनोद तोमर को भी जमानत दे दी. छह महिला पहलवानों और एक नाबालिग पहलवान द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद चर्चा में आए सिंह और तोमर जारी समन के अनुपालन में पहली बार अदालत में पेश हुए और मामले में जमानत का अनुरोध किया. कई पदक विजेता पहलवानों, किसान समूहों और विपक्षी नेताओं के मुखर विरोध के बावजूद, सिंह को मामले में कभी गिरफ्तार नहीं किया गया, और उन्होंने लगातार सभी आरोपों को खारिज किया है.
सिंह के वकील ने ‘मीडिया ट्रायल’ का आरोप लगाया, जिस पर न्यायाधीश ने कहा कि वह उच्च न्यायालय या निचली अदालत के समक्ष एक आवेदन दायर कर सकते हैं. न्यायाधीश ने कहा, अदालत आवेदन पर उचित आदेश पारित करेगी. सिंह की तरफ से हालांकि इस संदर्भ में मेट्रोपॉलिटिन अदालत में कोई आवेदन नहीं दिया गया. इसके बाद अदालत ने सिंह और तोमर को बृहस्पतिवार तक अंतरिम जमानत दे दी, जब उनकी नियमित जमानत याचिका पर विचार किया जाएगा.
दिल्ली पुलिस ने छह बार के सांसद के खिलाफ 15 जून को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग), 354 ए (यौन उत्पीड़न), 354 डी (पीछा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप पत्र दायर किया था.
तोमर पर भादंसं की धारा 109 (किसी अपराध के लिए उकसाना), 354, 354ए और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप लगाया गया था. वर्तमान मामले के अलावा, एक नाबालिग पहलवान द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद सिंह के खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जो यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत थी. वह उन सात महिला पहलवानों में शामिल थी जिन्होंने सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.
दोनों प्राथमिकी में, एक दशक से अधिक समय में अलग-अलग समय और स्थानों पर सिंह द्वारा अनुचित स्पर्श, छेड़छाड़, पीछा करना और धमकी जैसे यौन उत्पीड़न के कई कथित उदाहरणों का उल्लेख किया गया है. नाबालिग पहलवान के पिता ने बाद में दावा किया था कि सांसद के खिलाफ उनके द्वारा लगाए गए आरोप ह्लझूठेह्व थे और उनका इरादा लड़की के साथ कथित अन्याय को लेकर उनसे हिसाब बराबर करना था.