बजट में 10 लाख रुपये तक के उच्च शिक्षा ऋण के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा, यूजीसी के आवंटन में कटौती

नयी दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को घोषणा की कि सरकार घरेलू संस्थानों में उच्च शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक के ऋण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी. हालांकि उच्च शिक्षा नियामक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के लिए अनुदान 60 प्रतिशत से अधिक घटा दिया गया है. केंद्रीय बजट के अनुसार, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के लिए आवंटन में भी लगातार दूसरे वर्ष कटौती की गई है.

स्कूल शिक्षा के लिए बजट 535 करोड़ रुपये से अधिक बढ़ाया गया है लेकिन उच्च शिक्षा के लिए अनुदान पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान (आरई) से 9,600 करोड़ रुपये से अधिक कम हो गया. शिक्षा क्षेत्र के लिए कुल बजट आवंटन में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की कटौती की गई है. केंद्र ने 2024-25 के लिए शिक्षा मंत्रालय को 1.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए हैं, जबकि पिछले वित्त वर्ष में संशोधित अनुमान 1.29 लाख करोड़ रुपये से अधिक था. केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने संसद में 2024-25 का बजट पेश करते हुए कहा कि घरेलू संस्थानों में उच्च शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक के ऋण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी. उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए हर साल एक लाख छात्रों को सीधे ई-वाउचर दिए जाएंगे, जिसमें ऋण राशि का तीन प्रतिशत ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा.

सीतारमण ने कहा, ”सरकार की योजनाओं और नीतियों के तहत किसी भी लाभ के लिए पात्र नहीं रहे हमारे युवाओं की मदद के लिए सरकार घरेलू संस्थानों में उच्च शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक के ऋण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी. इस उद्देश्य के लिए ई-वाउचर हर साल एक लाख छात्रों को सीधे दिए जाएंगे, जिसमें ऋण राशि का तीन प्रतिशत ब्याज अनुदान होगा.” केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वित्त मंत्री द्वारा घोषित व्यापक और ठोस उपाय छात्रों, शिक्षाविदों और उद्योग-सभी हितधारकों के लिए लाभकारी हैं.

प्रधान ने कहा, ”इससे हमारे युवाओं की आकांक्षाएं पूरी होंगी, लोगों को अधिक आजीविका के अवसर मिलेंगे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल तक पहुंच बढ़ेगी और अगले पांच वर्षों में 4.1 करोड़ से अधिक नए रोजगार सृजित होंगे.” शैक्षणिक संस्थानों में शोध और नवाचार के लिए बजट में 161 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है. इसी तरह, विश्व स्तरीय संस्थानों के लिए आवंटन 1,300 करोड़ रुपये (संशोधित अनुमान) से बढ़ाकर 1,800 करोड़ रुपये कर दिया गया है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के लिए वित्त पोषण को पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान 6,409 करोड़ रुपये से घटाकर 2,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 60.99 प्रतिशत कम हुआ है. सरकार द्वारा प्रस्तुत अंतरिम बजट में भी इसमें कटौती की गई थी.

प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों आईआईएम को लगातार दूसरे साल बजट में कटौती का सामना करना पड़ा है. पिछले साल आईआईएम के बजट को 608.23 करोड़ रुपये (संशोधित अनुमान) से घटाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया गया था. इस साल इसे 331 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से घटाकर 212 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के लिए बजट में भी पिछले साल के संशोधित अनुमान से मामूली कमी देखी गई है. पिछले साल का संशोधित अनुमान 10,384.21 करोड़ रुपये था और चालू वित्त वर्ष के लिए 10,324.50 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है.
हालांकि, केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए सहायता अनुदान में 28 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है. केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए बजट को संशोधित अनुमान 12,000.08 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 15,472 करोड़ रुपये कर दिया गया है. स्कूली शिक्षा में, केन्द्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों, एनसीईआरटी, पीएम श्री स्कूलों तथा राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों द्वारा संचालित विद्यालयों को अनुदान सहायता के लिए बजट आवंटन में वृद्धि देखी गई है.

बजट में कौशल विकास क्षेत्र के लिए वित्त मंत्री द्वारा घोषित उपायों में 1,000 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को ‘हब और स्पोक मॉडल’ में उन्नत करना, पाठ्यक्रम सामग्री को उद्योगों की कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना तथा मॉडल कौशल ऋण योजना में संशोधन करना शामिल है.

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