सीबीआई ने भ्रष्टाचार मामले में अनिल अंबानी, राणा कपूर के खिलाफ दायर किया आरोपपत्र

नयी दिल्ली. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उद्योगपति अनिल अंबानी के समूह से जुड़ी कंपनियों एफएल और आरएचएफएल तथा यस बैंक एवं उसके पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) राणा कपूर के परिजनों की फर्मों के बीच हुए कथित धोखाधड़ी वाले लेनदेन के सिलसिले में अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ बृहस्पतिवार को आरोपपत्र दायर किया. सीबीआई का आरोप है कि ऐसे लेनदेन की वजह से बैंक को 2,796 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

मुंबई की एक विशेष अदालत के समक्ष दायर आरोप पत्र में सीबीआई ने कहा कि अंबानी अनिल धीरूभाई अंबानी (एडीए) समूह के अध्यक्ष और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के निदेशक हैं, जो एफएल और आरएचएफएल के मलिकाना हक वाली कंपनी है.
घटनाक्रम पर एडीए समूह की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

सीबीआई ने अंबानी के अलावा राणा कपूर, बिंदु कपूर, राधा कपूर, रोशनी कपूर, एफएल, आरएचएफएल (अब ऑथम इंवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड), आरएबी एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, इमेजिन एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, ब्लिस हाउस प्राइवेट लिमिटेड, इमेजिन हैबिटेट प्राइवेट लिमिटेड, इमेजिन रेसिडेंस प्राइवेट लिमिटेड और मॉर्गन क्रेडिट्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत आरोपपत्र दायर किया है.

सीबीआई ने यस बैंक के मुख्य सतर्कता अधिकारी की शिकायत पर 2022 में बैंक के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और सीईओ राणा कपूर तथा रिलायंस कर्मिशयल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) के खिलाफ दो मामले दर्ज किए थे.

सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “यस बैंक ने वर्ष 2017 में राणा कपूर की मंजूरी के बाद एफएल के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) और वाणिज्यिक ऋणों में लगभग 2,045 करोड़ रुपये और आरएचएफएल के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर और वाणिज्यिक पत्रों में 2,965 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जबकि केयर रेटिंग्स ने एडीए समूह की वित्तीय कंपनियों को बिगड़ती वित्तीय स्थिति और प्रतिकूल बाजार मूल्यांकन के मद्देनजर “निगरानी में” रखा था.” गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर एक तरह का ऋण साधन है, जो कंपनियां जनता से लंबी अवधि के लिए धन जुटाने के लिए जारी करती हैं. बयान के मुताबिक, सीबीआई की जांच से पता चलता है कि यस बैंक की ओर से एफएल और आरएचएफएल में निवेश किए गए धन को बाद में कई स्तरों पर निकाला गया, जो सार्वजनिक धन के व्यवस्थित दुरुपयोग को दर्शाता है.

बयान में कहा गया है, “जांच में राणा कपूर और अनिल अंबानी के बीच एक साजिश का पता चला, जिसमें राणा कपूर ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करके यस बैंक लिमिटेड के बड़े सार्वजनिक धन को वित्तीय रूप से संकटग्रस्त एडीए समूह की कंपनियों में लगाया, जबकि एडीए समूह ने भी बदले में राणा कपूर के परिजनों (पत्नी बिंदु कपूर और बेटियों राधा कपूर, रोशनी कपूर) के मलिकाना हक वाली संकटग्रस्त फर्मों को रियायती दर पर ऋण दिया और उनमें निवेश किया.”

इसमें कहा गया है, “धोखाधड़ी वाले इस लेनदेन के चलते यस बैंक को भारी नुकसान (2,796.77 करोड़ रुपये की राशि) हुआ, जबकि एफएल, आरएचएफएल और एडीए समूह की अन्य कंपनियों के साथ-साथ राणा कपूर के परिजनों के स्वामित्व वाली कंपनियों को अवैध लाभ मिला.” बयान के अनुसार, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड की एक अन्य सहायक कंपनी ‘रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड्स’ ने अंबानी के निर्देश पर 2017-18 में कपूर परिवार के स्वामित्व वाली एक अन्य इकाई मॉर्गन क्रेडिट्स प्राइवेट लिमिटेड के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर में 1,160 करोड़ रुपये का निवेश किया.

इसमें कहा गया है, “रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड्स ने यस बैंक से 249.8 करोड़ रुपये मूल्य के एडीए ग्रुप डिबेंचर भी खरीदे.” बयान के मुताबिक, इसके अलावा रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड्स ने यस बैंक के असुरक्षित ऋण उपकरणों (एटी1 बॉण्ड) में भी 1,750 करोड़ रुपये का निवेश किया. इसमें आरोप लगाया है, “इन उच्च-जोखिम और उच्च-प्रतिफल वाले बॉण्ड की कोई निश्चित परिपक्वता तिथि नहीं थी और संकट की स्थिति में इन्हें या तो इक्विटी में परिर्वितत किया जा सकता था या पूरी तरह से बट्टे खाते में डाला जा सकता था. परिसमापन की स्थिति में एटी1 बॉन्ड का स्थान अन्य ऋणों से सबसे नीचे होता है.”

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