
बेंगलुरु. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 16वें वित्त आयोग से बृहस्पतिवार को अनुरोध किया कि वह उपकर और अधिभार को सकल कर राजस्व के पांच प्रतिशत पर रखने की सिफारिश करें तथा इससे अधिक राशि को विभाजन योग्य कर राशि में शामिल करना चाहिए.
यहां एक बैठक में 16वें वित्त आयोग के चेयरमैन अरविंद पनगढि.या और उसके सदस्यों से उन्होंने यह भी सिफारिश करने का अनुरोध किया कि केंद्रीय करों में विभाजन योग्य राशि में से कम-से-कम 50 प्रतिशत हस्तांतरण होना चाहिए. सिद्धारमैया ने कहा कि आवश्यक संविधान संशोधन लाकर केंद्र के सभी गैर-कर राजस्व को विभाजन योग्य केंद्र करों में शामिल किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से उन्नत राज्य गरीब राज्यों को सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन यह उनके अपने निवासियों या आर्थिक दक्षता की कीमत पर नहीं होना चाहिए.
सिद्धारमैया ने कहा, ” इसके अलावा, ऐसे राज्यों के करदाता उम्मीद करते हैं कि उनके कर का इस्तेमाल उनके लिए होगा. इससे जनता में विश्वास उत्पन्न होता है. इसलिए वित्त आयोग को दक्षता और प्रदर्शन के साथ समानता को संतुलित करते हुए कड़ी मेहनत करनी होगी.” मुख्यमंत्री ने कहा कि 15वें वित्त आयोग के बराबरी को दिए गए असंगत महत्व के कारण कर्नाटक और इसी प्रकार के राज्यों को वित्तीय व जनसंख्या दोनों दृष्टि से अपने अच्छे प्रदर्शन के बावजूद खामियाजा भुगतना पड़ता है.
उन्होंने कहा कि उपकर व अधिभार को विभाजन योग्य कर राशि का हिस्सा नहीं हैं, पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने उन पर अपनी निर्भरता बढ़ा दी है. इससे विभाजन योग्य राशि सकल कर राजस्व के समान अनुपात में नहीं बढ़ रही है. इससे सभी राज्यों को काफी नुकसान हुआ है.
सिद्धारमैया ने कहा कि विभाज्य ‘पूल’ से उपकर व अधिभार को साझा न करने के कारण कर्नाटक को 2017-18 से 2024-25 की अवधि में 53,359 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. उन्होंने कहा कि केंद्र से वित्तीय हस्तांतरण में कमी से राज्यों के भौतिक तथा मानवीय बुनियादी ढांचे में निवेश करने को लेकर हाथ बांध दिए हैं. इसका तत्काल समाधान किया जाना चाहिए.



