अरुणाचल प्रदेश सीमा पर भारत और चीन के बीच जारी सैन्य गतिरोध की ITBP द्वारा पुष्टि किए जाने के बाद, भारत ने एक बार फिर चीन को आगाह किया है कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों के समग्र विकास के लिए जरूरी है। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले महीने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई मुलाकात के दौरान दिए गए संदेश को ही दोहराती है।
ITBP प्रमुख ने चीन की सैन्य बढ़त को लेकर चेतावनी दी है और अरुणाचल में आमना-सामना होने की पुष्टि की है। विगत 22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में बोलते हुए DG of ITBP शत्रुजीत कपूर ने कहा कि पिछले कुछ वक्त से अरुणाचल के कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ झड़प हुई, जो अभी भी जारी है.”
कपूर ने पुष्टि की कि ‘जुलाई से अरुणाचल प्रदेश में चीनी PLA सैनिकों के साथ झड़पें हो रही हैं। इनमें शी जिनपिंग की दिल्ली यात्रा के दौरान हुई घटनाएं भी शामिल हैं।’
उन्होंने रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका के तनावों का उदाहरण देते हुए बताया कि ड्रोन एक अहम संतुलनकारी हथियार हो सकते हैं।
साथ ही, उन्होंने ITBP के नए ‘शौर्य’ कमांडो और ड्रोन प्लाटून जैसे आधुनिकीकरण के प्रयासों की तारीफ की। इन बयानों पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और सरकार की तैयारियों तथा सीमा सुरक्षा पर सवाल उठाए। वहीं, विदेश मंत्रालय ने कहा कि LAC पर समय-समय पर होने वाली रुकावटों को कूटनीति के जरिए सुलझा लिया जाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा कि आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान में केवल चीन के साथ आमना-सामना होने की बात कही गई है। इसमें कहीं भी किसी इलाके पर कब्जा होने का कोई संकेत नहीं है।