
नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग ने कहा कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के 126 गांवों के लोगों ने आजादी के बाद से वहां पहली बार बने मतदान केन्द्रों पर मतदान किया. निर्वाचन आयोग ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में 126 नए मतदान केन्द्रों को ”गोली पर मतपत्र की जीत” करार दिया. एक अधिकारी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के हालिया बयान को याद किया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रत्येक क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी साथ ही चुनाव के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किया जाएगा.
सुकमा जिले के चिंतागुफा थाना क्षेत्र में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में चार सुरक्षार्किमयों के घायल होने के बीच निर्वाचन आयोग ने राज्य में पहले चरण के मतदान को ” स्वतंत्र, निष्पक्ष और काफीहद तक शांतिपूर्ण” करार दिया. निर्वाचन आयोग के अनुसार नए मतदान केन्द्रों के निर्माण से इन गांवों के लोगों को पेश आने वाली समस्याओं का अंत हो गया क्योंकि उन्हें अब वामपंथी उग्रवादियों की धमकियों के बीच घने जंगलों, पहाड़ों, नदियों के रास्ते से नहीं जाना पड़ेगा.
नए मतदान केंद्र चुनाव आयोग के मानदंडों के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मतदाता को वोट देने के लिए दो किलोमीटर के दायरे से आगे नहीं जाना पड़े. इन 126 बूथ में से कांकेर में 15, अंतागढ़ में 12, कोंटा में 20, चित्रकोट में 14, भानुप्रतापपुर में पांच, जगदलपुर में चार, बस्तर में एक, कोंडागांव में 13, केशकाल में 19, नारायणपुर में नौ, दंतेवाड़ा में आठ और छह बूथ बीजापुर विधानसभा क्षेत्र में बनाए गए हैं. निर्वाचन आयोग ने कहा कि राज्य के कांकेर में पखांजूर क्षेत्र में ‘रेनबो’ मॉडल मतदान केंद्र स्थापित किया गया है क्योंकि तृतीय लिंग के सभी मतदाता इसी क्षेत्र में रहते हैं.



