
चिक्कबल्लापुर/बेंगलुरु. कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया का बयान उनके लिए ‘वेद वाक्य’ के समान है. वह सिद्धारमैया के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी आलाकमान फैसला करेगा तो वह शीर्ष पद पर बने रहेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि नेतृत्व पर अंतिम निर्णय पार्टी आलाकमान पर निर्भर करता है और उन्हें तथा उपमुख्यमंत्री को इसे स्वीकार करना होगा.
शिवकुमार ने मुख्यमंत्री के बयान को लेकर संवाददाताओं द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ”एक बार उन्होंने (सिद्धरमैया ने) कह दिया तो यह हमारे लिए वेद वाक्य है.” कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल के ढाई साल 20 नवंबर को पूरे किये. इसके बाद से ही राज्य में मुख्यमंत्री परिवर्तन की अटकलों के बीच सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष तेज हो गया है.
कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस में प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच विधायकों की ‘खरीद-फरोख्त’ के भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि यह मुख्य विपक्षी पार्टी की ‘संस्कृति’ है.
उन्होंने कहा, ”भाजपा नेताओं ने पहले स्वीकार किया है कि उनकी पार्टी में मुख्यमंत्री बनने के लिए कितने हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना चाहिए… विधानसभा में दस्तावेजों के साथ इस पर भी चर्चा हुई कि अतीत में अन्य दलों के विधायकों को खरीदने के लिए उन्होंने कितने करोड़ रुपये का भुगतान किया था, वे शायद याद कर रहे हैं कि उन्होंने क्या किया था.” इस बीच, सिद्धरमैया के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ मंत्री के जे जॉर्ज ने शिवकुमार के साथ हाल ही में देर रात हुई बैठक को लेकर सफाई देते हुए कहा कि उस समय केवल सरकारी विषयों और आगामी बेंगलुरु निगम चुनाव पर चर्चा की गई थी.
जॉर्ज ने यादगीर में संवाददाताओं से कहा, ”शिवकुमार उपमुख्यमंत्री हैं, पार्टी के सहयोगी हैं और हम मिलते रहते हैं, इसमें क्या गलत है? मैंने शिवकुमार के साथ सरकारी मामलों और आगामी बेंगलुरु निगम चुनाव पर चर्चा की है. एआईसीसी ने मुझे (नेतृत्व के मुद्दों पर) चर्चा करने की कोई जिम्मेदारी नहीं दी है.” एक सवाल के जवाब में जॉर्ज ने कहा कि ”पार्टी में कोई बगावत नहीं है जिसे शांत किया जा सके. हम सब एक कांग्रेस परिवार हैं.”
शिवकुमार समर्थक और विधायक दिल्ली पहुंचे, सिद्धरमैया ने आलाकमान का निर्देश मानने की बात कही
कर्नाटक में मुख्यमंत्री परिवर्तन के मुद्दे पर सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर जारी ”सत्ता संघर्ष” के बीच उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार का समर्थन करने वाले विधायकों का एक और समूह पार्टी आलाकमान से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचा है. वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सोमवार को कहा कि अगर पार्टी आलाकमान फैसला करता है तो वह शीर्ष पद पर बने रहेंगे.
सूत्रों के अनुसार, कम से कम छह विधायक रविवार रात राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे हैं. सूत्रों ने बताया कि शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग को लेकर जल्द ही कुछ और विधायकों के दिल्ली जाने की संभावना है. इस बीच, सिद्धरमैया ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”हम आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे. अगर वे तय करते हैं कि मुझे (मुख्यमंत्री पद पर) बने रहना चाहिए, तो मैं पद पर बना रहूंगा. आखिरकार, आलाकमान जो भी फैसला करेगा, मैं उसे स्वीकार करूंगा. शिवकुमार को भी उसे स्वीकार करना चाहिए.”
यह पूछे जाने पर कि क्या शिवकुमार मुख्यमंत्री बनेंगे, सिद्धरमैया ने कहा, ”जब मैंने कहा कि आलाकमान फैसला करेगा, तो आप मुझसे फिर वही बात पूछ रहे हैं.” खबरों के अनुसार, यह मामला 2023 में हुए सत्ता-साझेदारी समझौते पर आधारित है, जिसके तहत सिद्धरमैया को ढाई साल (20 नवंबर तक) मुख्यमंत्री रहना था और इसके बाद यह जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को मिलनी थी.
पार्टी सूत्रों ने बताया कि जो विधायक दिल्ली में हैं, उनमें एच सी बालकृष्ण (मगदी), के एम उदय (मद्दूर), नयना मोटाम्मा (मुदिगेरे), इकबाल हुसैन (रामनगर), शरथ बाचेगौड (होसाकोटे) और शिवगंगा बसवराज (चन्नागिरी) शामिल हैं. सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे फिलहाल बेंगलुरु में हैं और वह जल्द ही दिल्ली जाने वाले हैं, वहीं कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी के भी विदेश यात्रा से लौटने की संभावना है. शिवकुमार का समर्थन करने वाले लगभग दस विधायकों ने पिछले सप्ताह नयी दिल्ली जाकर खरगे से मुलाकात की थी.
राज्य में कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने ढाई साल पूरे कर लिए. हालांकि, शिवकुमार ने तब कहा था कि उन्हें विधायकों के खरगे से मिलने के लिए दिल्ली जाने की जानकारी नहीं है. शिवकुमार का समर्थन करने वाले विधायकों के दिल्ली जाने के बाद, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शनिवार को बेंगलुरु स्थित खरगे के आवास पर उनके साथ एक घंटे से ज्यादा समय तक बैठक की.
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिद्धरमैया अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल पर जोर दे रहे हैं, वहीं शिवकुमार चाहते हैं कि पार्टी पहले नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला करे. पार्टी के कई अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, अगर कांग्रेस आलाकमान मंत्रिमंडल में फेरबदल को मंज.ूरी दे देता है, तो यह संकेत होगा कि सिद्धरमैया पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा करेंगे लेकिन इससे शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं कम हो जाएंगी.



