‘सेबी प्रमुख की बनाई कंपनी’ और ऑडिटर एक ही पते पर पंजीकृत: कांग्रेस

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रमुख के रूप में नियुक्ति से पहले माधवी पुरी बुच ने जिस कंसल्टिंग कंपनी की स्थापना की थी, वह और उसका वैधानिक ऑडिटर एक ही पते पर पंजीकृत हैं. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि अदाणी घोटाले और सेबी की कार्यशैली की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की आवश्यकता है. हिंडनबर्ग रिसर्च ने शनिवार को अपनी एक रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि सेबी की अध्यक्ष बुच और उनके पति की कथित अदाणी धन हेराफेरी घोटाले में इस्तेमाल किए गए अस्पष्ट ‘विदेशी फंड’ में हिस्सेदारी थी. सेबी प्रमुख बुच और उनके पति ने एक संयुक्त बयान जारी कर हिंडनबर्ग के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से बेबुनियाद बताया था.

रमेश ने एक बयान में दावा किया, ”सेबी की प्रमुख माधवी पुरी बुच द्वारा संभावित कदाचार के बारे में और भी सवाल उठ रहे हैं. सेबी प्रमुख के रूप में उनकी नियुक्ति से पहले उनके द्वारा स्थापित एक कंसल्टिंग कंपनी की विनियामक फाइलिंग से पता चलता है कि यह कंपनी और उसके वैधानिक ऑडिटर एक ही पते पर पंजीकृत हैं.” उनके मुताबिक, माधवी बुच ने इस कंसल्टिंग कंपनी के निदेशक के रूप में पद छोड़ दिया है, लेकिन सेबी प्रमुख के पति 2019 से उस कंपनी के निदेशक हैं.

कांग्रेस नेता ने कहा, ”एक कंपनी और उसके ऑडिटर का एक ही पता साझा करना आम तौर पर खराब कॉर्पोरेट प्रशासन का संकेत है. आईसीएआई की आचार संहिता के अनुसार, वैधानिक लेखाकारों को पक्षपात, हितों के टकराव या अनुचित प्रभाव से बचना चाहिए. एक ही स्थान साझा करना इस तरह के पक्षपात का संकेत देता है.” उन्होंने आरोप लगाया कि सेबी प्रमुख और उनके पति ने यह दावा करके भी जनता को गुमराह किया कि कंसल्टिंग कंपनी ”सेबी में उनकी नियुक्ति के तुरंत बाद नि्क्रिरय हो गई.”

रमेश ने दावा किया, ”यह सच नहीं है. 2019 से 2024 के बीच कंपनी ने 3.63 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जिसमें से अधिकतर 2019 से 2022 के बीच अर्जित हुआ, जब बुच सेबी की पूर्णकालिक सदस्य थीं. मार्च 2022 में सेबी प्रमुख के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद, कंपनी ने लगभग 41.75 लाख रुपये कमाए.”

उन्होंने कहा कि अदाणी घोटाले और सेबी की कार्यशैली की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की आवश्यकता बढ़ती जा रही है. अदाणी समूह ने अमेरिकी शोध एवं निवेश कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च के नवीनतम आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और चुनिंदा सार्वजनिक सूचनाओं से छेड़छाड़ करने वाला बताते हुए रविवार को कहा था कि उसका बाजार नियामक सेबी की अध्यक्ष या उनके पति के साथ कोई वाणिज्यिक संबंध नहीं है.

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