कांग्रेस ने नीतीश को ‘रिमोट कंट्रोल संचालित मुख्यमंत्री’ बताया, 42 पन्नों का ‘आरोपपत्र’ जारी किया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 09 Oct 2025 09:37 PM
कांग्रेस ने नीतीश को ‘रिमोट कंट्रोल संचालित मुख्यमंत्री’ बताया, 42 पन्नों का ‘आरोपपत्र’ जारी किया
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पटना. कांग्रेस ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ 42 पन्नों का एक विस्तृत ‘आरोपपत्र’ जारी करते हुए बृहस्पतिवार को दावा किया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के 20 साल के शासन ने राज्य को “विनाश” की ओर धकेल दिया है.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नीतीश ”रिमोट कंट्रोल से संचालित मुख्यमंत्री’ हैं और उन्होंने बिहार में 65 प्रतिशत आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने को लेकर ठोस प्रयास नहीं किए. पार्टी ने सदाकत आश्रम स्थित बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में ’20 साल विनाश काल’ शीर्षक वाली एक पुस्तिका जारी की. इस अवसर पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ. के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित पार्टी के शीर्ष नेता मौजूद थे.

रमेश ने संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि बिहार की राजग सरकार में “भ्रष्टाचार चरम पर” है और यह सरकार “बिहार के बाहर दिल्ली और नागपुर (आरएसएस मुख्यालय) से ‘रिमोट कंट्रोल’ के जरिये संचालित हो रही है.” उन्होंने कहा, “यह तथाकथित ‘डबल इंजन’ सत्ता की मलाई पर पलता है.” राज्यसभा सदस्य रमेश ने दावा किया, “पिछले 20 वर्षों में बिहार स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार सृजन और विकास के अन्य सभी मानकों पर पिछड़ गया है, जबकि भ्रष्टाचार और अपराध में वृद्धि हुई है.” उन्होंने नीतीश पर तंज कसते हुए कहा, “हम इस ओर भी ध्यान आर्किषत करना चाहते हैं कि इन 20 वर्षों में ‘पलटी’ के छोटे-छोटे अंतराल भी रहे हैं.”

रमेश ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी “सामाजिक न्याय की विरोधी” है और उसने बिहार में जातीय सर्वेक्षण के खिलाफ दायर याचिका में भी “भूमिका निभाई” है. उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार के राजग में लौट जाने के बावजूद कमजोर वर्गों के लिए बढ.ाई गई आरक्षण सीमा संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल नहीं की गई. जब आरक्षण 69 प्रतिशत किया गया था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव की सरकार ने उस समय के सामाजिक कल्याण मंत्री सीताराम केसरी के माध्यम से उस कानून को नौवीं अनुसूची में डालकर न्यायिक हस्तक्षेप से बचा लिया था.”

रमेश ने कहा, ”मैं बिहार के ‘रिमोट कंट्रोल संचालित मुख्यमंत्री’ और उनके ‘कंट्रोलर’ से पूछना चाहता हूं कि आपने बिहार के 65 प्रतिशत आरक्षण वाले कानून को संविधान की नौवीं सूची में शामिल क्यों नहीं किया? अगर इसे शामिल किया जाता, तो आरक्षण को संवैधानिक सुरक्षा मिलती.” कांग्रेस नेताओं ने महागठबंधन में सीट बंटवारे के मसले पर कोई टिप्पणी नहीं की.

बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा, “हम अपने गठबंधन सहयोगियों से नियमित संपर्क में हैं. आज भी बैठक होनी है. कुछ दिनों में सब कुछ सार्वजनिक करेंगे. हम अपना घोषणापत्र भी जारी करेंगे.” भूपेश बघेल ने बिहार की राजग सरकार को “ऐसे डबल इंजन” की संज्ञा दी, “जिसके पिस्टन जवाब दे चुके हैं और अब सिर्फ धुआं निकाल रहे हैं.” वहीं, अशोक गहलोत ने बिहार में हाल ही में शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ पर सवाल उठाए. गहलोत ने कहा कि बिहार सरकार राज्य में सशक्त स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित करने में विफल रही है, जैसा कि उन्होंने राजस्थान में अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में किया था.

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