कच्चातिवु द्वीप को फालतू बताकर कांग्रेस ने मां भारती का एक अंग काट दिया : मोदी

मेरठ/चेन्नई. प्रधानमंत्री नरेन्­द्र मोदी ने रविवार को विपक्षी दलों के समूह खासतौर से कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि श्रीलंका एवं तमिलनाडु के बीच सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कच्चातिवु द्वीप को फालतू बताकर कांग्रेस ने मां भारती का एक अंग काट दिया था.

मेरठ से लोकसभा चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ”साथियों मेरठ की इस धरती का देश की अखंडता और एकता से बड़ा रिश्ता रहा है. यह स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडेय की कर्मभूमि है. यह धरती धन सिंह कोतवाल जैसे शूरवीर की धरती है.” उन्होंने भावुकता भरे अंदाज में कहा, ”शौर्य की इस धरती से आज मैं पूरे देश को बताना चाहता हूं कि कैसे कांग्रेस और इंडी गठबंधन देश की अखंडता एवं देश की एकता को तोड़ते रहे हैं. आज ही कांग्रेस का एक और देश विरोधी कारनामा देश के सामने आया है.”

इसके पहले मामले को लेकर उन्होंने रविवार सुबह सोशल मीडिया मंच ‘एक्­स’ पर एक संदेश साझा किया था जिसमें कहा, ”आंखें खोलने वाली और चौंका देने वाली खबर. नए तथ्यों से पता चलता है कि कांग्रेस ने कैसे संवेदनाहीन ढंग से कच्चातिवु दे दिया था. इससे प्रत्येक भारतीय नाराज है और लोगों के दिमाग में यह बात बैठ गयी है कि हम कभी कांग्रेस पर भरोसा नहीं कर सकते.”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”भारत की एकता, अखंडता और हितों को कमजोर करना कांग्रेस का 75 वर्ष से काम करने का तरीका रहा है.” इस पर, रैली में इस पर विस्तार से बोलते हुए मोदी ने कहा, ”तमिलनाडु में भारत के समुद्री तट से कुछ किलोमीटर की दूरी पर श्रीलंका और तमिलनाडु के बीच में एक द्वीप है, कच्चातिवु यह द्वीप सुरक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है.” उन्होंने कहा, ”देश आजाद हुआ तब हमारे पास था, यह हमारे भारत का अभिन्न अंग था, लेकिन कांग्रेस ने चार पांच दशक पहले कह दिया कि यह द्वीप तो फालतू है, यहां तो कुछ होता ही नहीं है.”

मोदी ने आरोप लगाया कि ”— और यह कहते हुए मां भारती का एक अंग आजाद भारत में ये कांग्रेस के लोगों ने, इंडी एलायंस के साथियों ने काट दिया और भारत से अलग कर दिया. देश कांग्रेस के रवैये की कीमत आज तक चुका रहा है.” प्रधानमंत्री ने कहा, ”भारत के मछुआरे मछली पकड़ने समुद्र में जाते हैं, इस द्वीप की तरफ जाते हैं तो इन्­हें गिरफ्तार कर लिया जाता, उनके बोट को कब्जा कर लिया जाता है.” मोदी ने बहुत तीखे शब्दों में कहा, ”यह कांग्रेस के पाप का परिणाम है कि हमारे मछुआरे आज भी सजा भुगतते चले जा रहे हैं. कांग्रेस जब पास आती है तो उनकी बोलती बंद हो जाती है. द्रमुक जैसे कांग्रेस के साथी दल भी मुंह पर ताला लगाकर बैठ जाते हैं.”

विपक्ष पर लगातार हमलावर मोदी ने भीड़ से सवाल उठाते हुए कहा ”यह इंडी गठबंधन जिसने मां भारती का टुकड़ा करके दे दिया, क्या ऐसा गठबंधन देश हित में कोई फैसला ले सकता है क्या, देश का भला कर सकता है.” उन्होंने दावा किया, ”इंडी गठबंधन वाले न देश के जवानों का हित सोच सकते हैं, न ही देश के किसानों का हित सोच सकते हैं, न ही देश के मछुआरों का हित सोच सकते हैं.”

कच्चातिवु: सीतारमण ने द्रमुक से ‘झूठ’ फैलाना बंद करने को कहा
केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) को कच्चातिवु मुद्दे पर ”गलत जानकारी” देना बंद करना चाहिए. सीतारमण ने कच्चातिवु मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष के. अन्नामलाई द्वारा सरकारी अधिकारियों से प्राप्त एक आरटीआई जवाब का जिक्र करते हुए ‘एक्स’ पर कहा, ”आरटीआई जवाब से जो खुलासा हुआ है, ऐसा पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता अम्मा ने तमिलनाडु राज्य विधानसभा में आधिकारिक तौर पर कहा था.” अन्नामलाई ने ‘एक्स’ पर कहा कि एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक ने रविवार को सूचना का अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर एक खबर प्रकाशित की.

अन्नामलाई ने आरोप लगाया, ”कांग्रेस और द्रमुक ने श्रीलंका को कच्चातिवु सौंपने के लिए सांठगांठ की. कांग्रेस जब भी सत्ता में रही, उसे हमारे देश की सीमा, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने में सबसे कम दिलचस्पी थी.” सीतारमण ने एक वीडियो क्लिप टैग किया जिसे ‘एक्स’ पर पोस्ट किया गया था. वीडियो में दिवंगत जयललिता द्वारा वर्षों पहले विधानसभा में द्रमुक विधायक के पोनमुडी के सवाल पर दिया गया जवाब दिखाया गया है.

जयललिता ने विधानसभा में (2011-16 के दौरान) कहा था कि द्रमुक सदस्यों के पास कच्चातिवु पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा था कि द्रमुक सरकार में जब एम करुणानिधि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे, तब केंद्र सरकार द्वारा कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया गया था.

उन्होंने पूछा था, ”करुणानिधि क्या कर रहे थे जब केंद्र ने 1974 और 1976 में द्वीप को श्रीलंका को सौंपने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे?” जयललिता ने इस बात की भी जानकारी मांगी थी कि क्या करुणानिधि ने उस समय केंद्र के फैसले को रोकने के लिए कदम उठाए थे या उन्होंने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था? जयललिता ने द्रमुक विधायक पोनमुडी के सवाल का जवाब दिया था. पोनमुडी ने कहा था कि जयललिता ने 1991 में कहा था या नहीं कि वह कच्चातिवु को वापस ले आएंगी. उस समय, जयललिता ने अपनी टिप्पणी को याद करते हुए कहा था कि वह केंद्र सरकार के माध्यम से इस मामले पर कदम उठाएंगी. उन्होंने 1991 में यह नहीं कहा था कि वह “सैनिकों को सक्रिय करके” कच्चातीवू को पुन? प्राप्त कर लेंगी. उन्होंने आरोप लगाया था कि यह द्रमुक है जो मछुआरों की परेशानियों के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है.

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