‘टूलकिट’ के तहत चामुंडी पहाड़ी और मंदिर को निशाना बना रही है कांग्रेस : भाजपा

मैसूरु. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने रविवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस द्वारा हिंदू धार्मिक स्थलों को एक ”टूलकिट” के तहत यह दावा करके निशाना बनाया जा रहा है कि प्रसिद्ध चामुंडी पहाड़ी केवल हिंदुओं की नहीं है जहां चामुंडेश्वरी मंदिर स्थित है.

विपक्ष के नेता ने चामुंडेश्वरी मंदिर में दर्शन पूजन करने के बाद कांग्रेस सरकार को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी.
अशोक ने यहां पत्रकारों से कहा, ”कांग्रेस सरकार ने कहा है कि चामुंडेश्वरी मंदिर केवल हिंदुओं का नहीं है. इसलिए मेरा सरकार से सवाल है कि अगर यह हिंदुओं का नहीं है, तो किसका है? अगर आपमें हिम्मत है, तो क्या आप किसी मस्जिद के सामने जाकर कहेंगे कि यह मुसलमानों की नहीं है?” हिंदू धार्मिक केंद्रों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सबरीमला, तिरुपति, धर्मस्थल के बाद अब चामुंडी पहाड़ी है.

अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस यह कहकर ”वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति” कर रही है कि चामुंडी पहाड़ी और मंदिर केवल हिंदुओं के नहीं हैं. उन्होंने कहा कि यह बेहद निंदनीय है. उन्होंने कहा, ”धर्मस्थल के खिलाफ जारी दुष्प्रचार अभियान और षड्यंत्र के खिलाफ हम धर्मस्थल चलो रैली का आयोजन कर रहे हैं. अगर सरकार यह रुख अपनाती है कि चामुंडेश्वरी मंदिर केवल हिंदुओं का नहीं है, तो हम यहां चामुंडेश्वरी देवस्थान (मंदिर) चलो रैली का आयोजन करेंगे. यह एक हिंदू धार्मिक केंद्र है. अगर इसका अपमान किया गया तो हिंदू इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे.”

उन्होंने कहा कि हिंदुओं ने लगभग 500 वर्षों तक अयोध्या राममंदिर के लिए लड़ाई लड़ी और अब वहां मंदिर का निर्माण हो गया है. भाजपा विधायक दल के नेता ने चेतावनी दी कि ”यदि चामुंडेश्वरी मंदिर को आपके ‘टूलकिट’ के हिस्से के रूप में निशाना बनाया जाता है, तो आपका (कांग्रेस का) अंत यहीं से शुरू होगा. सावधान रहें.” उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार द्वारा पिछले सप्ताह यह कहे जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है कि चामुंडी पहाड़ी और देवी चामुंडेश्वरी हर धर्म की संपत्ति हैं और यह केवल हिंदुओं की संपत्ति नहीं है. इस बयान पर विपक्षी भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी.

उप-मुख्यमंत्री ने यह बयान अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को इस वर्ष 22 सितंबर को चामुंडी पहाड़ियों की चोटी पर विश्व प्रसिद्ध ‘मैसूरु दशहरा-2025’ समारोह का उद्घाटन करने के लिए दिए गए सरकारी निमंत्रण के विरोध पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिया था. एक पुराना वीडियो वायरल होने के बाद, भाजपा नेताओं और अन्य लोगों ने मुश्ताक को आमंत्रित करने के राज्य सरकार के फैसले पर आपत्ति जतायी है.

बानू मुश्ताक का एक पुराना वीडियो वायरल होने के बाद, भाजपा नेताओं और अन्य लोगों ने राज्य सरकार द्वारा लेखिका को दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए आमंत्रित करने के फैसले पर आपत्ति जतायी है. वीडियो में, मुश्ताक को कथित तौर पर कन्नड भाषा को ‘देवी भुवनेश्वरी’ के रूप में पूजा करने पर आपत्ति जताते और यह कहते सुना जा सकता है कि यह उनके जैसे लोगों (अल्पसंख्यकों) के लिए बहिष्कारपूर्ण है.

मैसूरु दशहरा के उद्घाटन के लिए मुश्ताक को सरकार द्वारा आमंत्रित करने पर अपनी आपत्ति व्यक्त करते हुए, अशोक ने मांग की कि वह अपने बयान के लिए माफी मांगें और पहले देवी चामुंडेश्वरी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करें. उन्होंने कहा, ”इसके बिना उन्हें चामुंडी पहाड़ी पर आने का नैतिक अधिकार नहीं होगा.” मुश्ताक के कथित विवादास्पद बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “अगर वह भुवनेश्वरी ताई को स्वीकार नहीं कर सकतीं, जिन्हें कन्नड़ ताई माना जाता है – हमारी भाषा कन्नड़ की देवी, तो वह चामुंडेश्वरी ताई को कैसे स्वीकार करेंगी, जो एक हिंदू देवी हैं?”

उन्होंने कहा कि जब कवि के. एस. निसार अहमद, जो एक मुस्लिम हैं, को दशहरा के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया था, तब कोई विरोध नहीं हुआ था. अशोक ने कहा कि अहमद ने किसी धर्म का विरोध नहीं किया और वह ऐसे व्यक्ति थे जो सभी धर्मों और कन्नड़ भाषा का सम्मान करते थे. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र और मैसूरु के सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार सहित कई भाजपा नेताओं ने भी मुश्ताक से दशहरा उद्घाटन के लिए सहमति देने से पहले देवी चामुंडेश्वरी के प्रति अपनी श्रद्धा स्पष्ट करने को कहा है. हालांकि, मुश्ताक ने कहा है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और उनके पुराने भाषण के चुनिंदा हिस्सों को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया है.

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