नयी दिल्ली. कांग्रेस ने जातिगत जनगणना वर्ष 2026 एवं 2027 में दो चरणों में कराए जाने के फैसले को लेकर बुधवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार सिर्फ ‘हेडलाइन’ (सुर्खियां) बटोरने में सक्षम में है, ‘डेडलाइन’ (समयसीमा) पूरा करने में नहीं. लद्दाख जैसे बर्फीले क्षेत्रों में जातीय गणना के साथ जनगणना की शुरुआत एक अक्टूबर, 2026 को होगी जबकि बाकी देश में इस प्रक्रिया की शुरुआत एक मार्च, 2027 से होगी. गृह मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”वास्तव में 2021 में होने वाली जनगणना को लेकर अगले 23 महीनों की देरी करने का कोई कारण नहीं है. मोदी सरकार केवल ‘हेडलाइन’ बटोरने में सक्षम है, ‘डेडलाइन’ पूरा करने में नहीं.” भारत में जनगणना का काम जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के प्रावधानों के अंतर्गत पूरा किया जाता है. पिछली जनगणना 2011 में दो चरणों में की गई थी. पहला चरण एक अप्रैल से 30 सितंबर 2020 के बीच चला था जिसमें मकानों की गिनती की गई थी और दूसरा चरण नौ फरवरी से 28 फरवरी 2011 तक चला था जिसमें लोगों की गिनती की गई थी.
क्या दिल्ली चिड़ियाघर को निजी समूह को सौंपने की तैयारी है? : कांग्रेस
कांग्रेस ने बुधवार को कुछ खबरों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि क्या दिल्ली चिड़ियाघर और ‘वनतारा’ के बीच प्रस्तावित समझौता चिड़ियाघर को एक निजी समूह को ”सौंपने” की दिशा में पहला कदम है? कांग्रेस महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि गुपचुप तरीके से किया गया ऐसा समझौता कई सवाल खड़े करता है और इसमें पारर्दिशता की जरूरत है.
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”दिल्ली चिड़ियाघर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सीधे नियंत्रण में है. यह बेहतर प्रबंधन के लिए एकमात्र वनतारा और गुजरात सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहा है.” वनतारा गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और रिलायंस फाउंडेशन द्वारा स्थापित एक पशु पुनर्वास केंद्र है.
रमेश ने कहा कि हालांकि सरकार ने दावा किया है कि यह प्रबंधन का हस्तांतरण नहीं था, लेकिन उसका पिछला रिकॉर्ड विश्वास करने योग्य नहीं है. उन्होंने सवाल किया, ”क्या यह चिड़ियाघर को निजी उद्यमी समूह को सौंपने की दिशा में पहला कदम है?” उन्होंने कहा कि ”इतने गुपचुप तरीके से किया गया ऐसा समझौता कई सवाल खड़े करता है, जिन्हें पारदर्शी तरीके से स्पष्ट करने की जरूरत है.”