कांग्रेस आपातकाल की सोच का समर्थन करती है: भाजपा

नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस पर उस सोच को बढ़ावा देने का आरोप लगाया जिसने आपातकाल लाया था. पार्टी ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के खिलाफ बिहार में राहुल गांधी का प्रदर्शन विपक्षी पार्टी की इस सोच को रेखांकित करता है कि संवैधानिक संस्थाओं की वैधता उनकी चुनावी जीत या हार पर निर्भर करती है.

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कुछ कांग्रेस नेताओं द्वारा अपने वरिष्ठ सहयोगी शशि थरूर की आलोचना करने पर विपक्षी पार्टी पर निशाना साधा. थरूर ने एक लेख लिखकर आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताया है. थरूर ने 1975 में घोषित आपातकाल की आलोचना करते हुए कहा है कि देश की जनता ने उस दौर की ज्यादतियों का स्पष्ट जवाब इंदिरा गांधी को बड़े अंतर से सत्ता से बाहर करके दिया था.

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने थरूर पर कटाक्ष करते हुए ‘एक्स’ पर लिखा, “जब कोई सहकर्मी भाजपा की बातों को शब्दश: दोहराने लगता है, तो आप सोचने लगते हैं – क्या पक्षी तोता बन रहा है? नकल करना पक्षियों में अच्छा लगता है, राजनीति में नहीं.” वह तिरुवनंतपुरम से चौथी बार के सांसद थरूर पर निशाना साध रहे थे, क्योंकि थरूर ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत की गई कार्रवाइयों का समर्थन करते हुए टिप्पणियां और लेख लिखे हैं.

इस मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर त्रिवेदी ने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस नेता को आपातकाल की ज्यादतियों का एहसास होने में 50 साल लग गए, लेकिन पार्टी के भीतर से आई प्रतिक्रिया से पता चलता है कि वह अब भी “बेशर्मी” से इस अतिवादी कदम का समर्थन कर रही है और इसके पीछे की सोच को उचित ठहरा रही है.

उन्होंने कहा कि आपातकाल इसलिए लगाया गया क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का चुनाव न्यायपालिका द्वारा रद्द कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने यह तय किया कि संवैधानिक पदों की वैधता उसकी सुविधा के अनुसार तय होगी. त्रिवेदी ने कहा, “बिहार में प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी की टिप्पणी इसी तरह की सोच को दर्शाती है कि संवैधानिक निकायों की वैधता उनकी चुनावी जीत या हार पर निर्भर करेगी.”

उन्होंने कहा कि पीढि.यां बदल गई हैं, लेकिन सोच नहीं बदली है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को पटना में आरोप लगाया था कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भाजपा के पक्ष में “धांधली” की गई थी और दावा किया कि केंद्र की राजग सरकार इस साल के अंत में होने वाले बिहार चुनावों में इसे दोहराना चाहती है. उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची में हेराफेरी करने के ‘महाराष्ट्र मॉडल’ का विस्तार है और निर्वाचन आयोग पर भाजपा के निर्देश पर काम करने का आरोप लगाया.

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