न्यायालय ने गिरोहबंद अधिनियम मामले में उप्र के विधायक अब्बास अंसारी को अंतरिम जमानत की पुष्टि की

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के गिरोहबंद अधिनियम के तहत एक मामले में विधायक अब्बास अंसारी को अंतरिम जमानत देने के अपने पूर्व आदेश की पुष्टि की। अंसारी दिवंगत गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के बेटे हैं। चित्रकूट जिले के कोतवाली कर्वी थाने में 31 अगस्त, 2024 को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत अंसारी और अन्य के खिलाफ जबरन वसूली और मारपीट के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

पिछले साल सात मार्च को शीर्ष अदालत ने अंसारी को इस मामले में छह सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जे. बागची एवं न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने मंगलवार को अंसारी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता निजाम पाशा की दलीलों पर गौर किया तथा मामले में पहले दी गई अंतरिम जमानत को नियमित कर दिया।

मार्च 2025 में शीर्ष अदालत से मिली राहत ने अंसारी की कासगंज जेल से रिहाई का रास्ता साफ कर दिया है। उनके खिलाफ अन्य सभी आपराधिक मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है। पीठ ने कुछ शर्तें लगाई थीं और बाद में उनमें से कुछ में ढील दी थी, जिनमें यह शर्त भी शामिल थी कि वह जांच अधिकारी की अनुमति के बिना लखनऊ नहीं छोड़ सकते।

अंसारी को चार नवंबर, 2022 को अन्य आपराधिक मामलों में हिरासत में लिया गया था और छह सितंबर, 2024 को गिरोहबंद अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। पीठ ने पिछले साल मार्च में उन्हें राहत देते हुए कहा कि गिरोहबंद अधिनियम के मामले को छोड़कर अन्य सभी आपराधिक मामलों में उन्हें जमानत दी गई है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 18 दिसंबर 2024 को इस मामले में अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी। इस मामले में नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान अन्य आरोपी हैं।

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