अदालत ने कुमार सानू के खिलाफ आपत्तिजनक वीडियो हटाने के बारे में मेटा, गूगल से जानकारी मांगी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 13 Oct 2025 10:46 PM
अदालत ने कुमार सानू के खिलाफ आपत्तिजनक वीडियो हटाने के बारे में मेटा, गूगल से जानकारी मांगी
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नयी दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच मेटा और गूगल से पूछा कि क्या वे गायक कुमार सानू के खिलाफ छेड़छाड़ कर तैयार किए गए वीडियो और अशोभनीय भाषा वाले यूआरएल हटाने को तैयार हैं. अदालत ने यह सवाल सानू की याचिका पर सुनवाई के दौरान उठाया, जिसमें उन्होंने अपने नाम, आवाज, गायन शैली और तकनीक सहित अपने व्यक्तित्व एवं प्रचार अधिकारों की रक्षा का अनुरोध किया है.

न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कहा, “प्रतिवादी 7 (मेटा प्लेटफॉर्म्स) और 20 (गूगल एलएलसी) के वकील को यह भी निर्देश लेने का आदेश दिया जाता है कि क्या वे उक्त वीडियो हटाएंगे…और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों के अनुसार शिकायत अधिकारी द्वारा उन्हें क्यों नहीं हटाया जाना चाहिए.” उच्च न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई की और सानू के वकील से कुछ स्पष्टीकरण मांगा तथा मामले को 15 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील ने आपत्तिजनक ‘यूआरएल’ की एक सूची पेश की और उनकी समीक्षा के लिए समय मांगा है.

सोशल मीडिया मंचों फेसबुक और इंस्टाग्राम का मालिकाना हक रखने वाले मेटा प्लेटफॉर्म के वकील ने कहा कि वे इन यूआरएल की समीक्षा करेंगे और यह बताने के लिए समय मांगा कि वे किन ‘यूआरएल’ को हटाएंगे. याचिका में सानू ने अपने व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों की रक्षा का अनुरोध किया है, जिसमें उनका नाम, आवाज, गायन शैली और तकनीक, गायन के तौर-तरीके, चित्र, व्यंग्यचित्र, फोटो और हस्ताक्षर शामिल हैं.

गायक ने तीसरे पक्ष द्वारा अनधिकृत या बिना लाइसेंस के उपयोग और व्यावसायिक दोहन के खिलाफ भी रक्षा का अनुरोध किया है.
अधिवक्ता शिखा सचदेवा और सना रईस खान के माध्यम से दायर याचिका में कॉपीराइट अधिनियम के प्रावधानों के आधार पर सानू को उनकी प्रस्तुति में प्रदत्त नैतिक अधिकारों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है. याचिका में दावा किया गया है कि प्रतिवादी गायक का नाम, आवाज, समानता और प्रचार अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं.

हाल में अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन, उनके पति अभिषेक बच्चन, फिल्मकार करण जौहर, तेलुगू अभिनेता अक्किनेनी नागार्जुन, ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और पत्रकार सुधीर चौधरी ने भी अपने व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों की रक्षा का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था और अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की थी.

सानू ने उनके प्रदर्शन और आवाज से संबंधित ऐसे ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग का मुद्दा उठाया है, जो उनकी बदनामी करते हैं और उन्हें “अप्रिय हास्य” का विषय बनाते हैं, जिससे उनके नैतिक अधिकारों का उल्लंघन होता है. उन्होंने अपनी आवाज, गायन शैली और तकनीक, गायन के तरीके, तथा उनके चेहरे के साथ छेड़छाड़ करके कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल कर बनाई गई सामग्री का भी मुद्दा उठाया है.

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