
नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शिक्षाविद् मधु किश्वर के खिलाफ 17 साल पुराने हत्या के प्रयास के मामले को रद्द कर दिया और कहा कि यह प्राथमिकी दुर्भावनापूर्ण रूप से बदले की भावना से दर्ज कराई गई थी। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने 16 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश पारित किया।
उच्च न्यायालय ने यह आदेश किश्वर की याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया, जिसमें उन्होंने जून 2008 में उनके खिलाफ तत्कालीन भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या के प्रयास, जानबूझकर चोट पहुंचाने और आपराधिक धमकी के कथित अपराधों के लिए दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया था।
प्राथमिकी 31 दिसंबर 2007 को शिकायतकर्ता के परिवार और किश्वर के बीच हुए विवाद से संबंधित है। शिकायतकर्ता ने किश्वर पर आरोप लगाया था कि उन्होंने कोटला मुबारकपुर इलाके में सेवा नगर मार्केट में दुकानों के कथित आवंटन को लेकर हुए विवाद के दौरान अपने चालक को उन्हें (शिकायतकर्ता) और उनके परिवार के सदस्यों को कार से कुचलने का निर्देश दिया था।
प्राथमिकी में आरोप था कि किश्वर और उनके साथियों ने शिकायतकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों पर हमला किया, जिससे उन्हें गंभीर चोट आईं। हालांकि, किश्वर के वकील ने दावा किया कि उन्होंने (किश्वर) ने शिकायतकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसके जवाब में शिकायतकर्ता ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई।
अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता से बदला लेने के लिए प्राथमिकी दर्ज कराया जाना दुर्भावना से प्रेरित जवाबी हमला है। दोनों प्राथमिकी 31 दिसंबर, 2007 को हुई घटना से संबंधित हैं।



