दिल्ली पुलिस की टीम केजरीवाल के आवास पर पहुंची, सीसीटीवी डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर किया जब्त

घातक हो सकता था, बिभव जवाब देने से बच रहे: दिल्ली पुलिस ने रिमांड दस्तावेज में कहा

नयी दिल्ली. दिल्ली पुलिस की एक टीम आम आदमी पार्टी (आप) की राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल के साथ कथित मारपीट की जांच के सिलसिले में रविवार को यहां मुख्यमंत्री केजरीवाल के आधिकारिक आवास पर पहुंची. सूत्रों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पुलिस की टीम ने सीसीटीवी डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किये हैं ताकि 13 मई को मालीवाल पर हुए कथित हमले की फुटेज हासिल की जा सके. उस दिन केजरीवाल के करीबी सहयोगी बिभव कुमार ने मुख्यमंत्री आवास पर आप की राज्यसभा सदस्य पर कथित हमला किया था. मालीवाल ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री आवास की सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई है.

कुमार को शनिवार को गिरफ्तार किया गया और एक अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. सूत्रों ने बताया कि कुमार पूछताछ के दौरान गोलमोल जवाब दे रहे थे. दिल्ली पुलिस ने मालीवाल की शिकायत के बाद छेड़छाड़ और गैर इरादतन हत्या की कोशिश के आरोपों के तहत कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया था.

सिविल लाइंस पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 308 (गैर इरादतन हत्या की कोशिश), 341 (बंधक बनाना), 354बी(निर्वस्त्र करने के इरादे से महिला पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग करना), 506 (आपराधिक भयादोहन), और 509 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द, भाव-भंगिमा का इस्तेमाल करना या कृत्य करना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है.

घातक हो सकता था, बिभव जवाब देने से बच रहे: दिल्ली पुलिस ने रिमांड दस्तावेज में कहा

दिल्ली पुलिस ने ‘आम आदमी पार्टी’ (आप) की नेता एवं राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल पर कथित हमले के मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सहयोगी बिभव कुमार को सात दिन की हिरासत में भेजे जाने के लिए शनिवार देर शाम दाखिल की गई रिमांड अर्जी में कहा कि यह एक ”गंभीर मामला” है जिसमें ”बेरहमी से किया गया हमला घातक” हो सकता था. कुमार को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजने वाले मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गौरव गोयल से जांच एजेंसी ने कहा कि केजरीवाल के सहयोगी पुलिस के साथ सहयोग नहीं कर रहे और जवाब देने से बच रहे हैं.

उत्तरी जिला अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अंजिता चेप्याला द्वारा हस्ताक्षरित रिमांड अर्जी में कहा गया है, ”यह एक बहुत ही गंभीर मामला है जिसमें एक सार्वजनिक हस्ती, संसद सदस्य पर बेरहमी से हमला किया गया जो घातक हो सकता था. विशिष्ट सवाल किए जाने के बावजूद आरोपी ने जांच में सहयोग नहीं किया है और वह जवाब देने से बच रहा है.” रिमांड अर्जी में कहा गया है कि मजिस्ट्रेट के सामने मालीवाल की गवाही की चिकित्सकीय साक्ष्यों ने पुष्टि की है.

अर्जी में कहा गया है कि मालीवाल के आरोपों के अनुसार, कुमार ने उन पर ”बेरहमी के हमला किया”, उन्हें घसीटा और उनका सिर मेज पर मारा इसके अलावा वह उन पर चिल्लाए, उन्होंने उन्हें धमकाया और उनके लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया.
इसमें कहा गया है कि इस मामले में ”सबसे अहम सबूत” घटनास्थल का डिजिटल वीडियो रिकॉर्ड (डीवीआर) है जिसे अभी तक पुलिस को मुहैया नहीं कराया गया है.

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