दिल्ली तुर्कमान गेट हिंसा: पत्थरबाजों के खिलाफ कार्रवाई, 10 लोग हिरासत में, उपद्रवियों की पहचान का काम जारी

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के अभियान ने हिंसक रूप ले लिया। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत देर रात यह कार्रवाई शुरू की थी। हालांकि, स्थानीय लोगों ने इस अभियान का विरोध किया, जिसके बाद स्थिति बेकाबू हो गई। विरोध कर रहे लोगों की भीड़ ने पुलिस और एमसीडी की टीम पर पथराव कर दिया। इस हिंसक घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल पैदा हो गया।

दिल्ली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए स्थिति को नियंत्रित कर लिया। पथराव की इस घटना में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और उपद्रवियों की पहचान का काम तेजी से जारी है। प्रारंभिक जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कई उपद्रवियों को हिरासत में भी लिया गया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जो भी लोग इस घटना में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर की जा रही थी, लेकिन कुछ लोगों ने इसे हिंसक रूप देकर कानून व्यवस्था को चुनौती दी।

पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया
दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। लगभग 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। सीसीटीवी फुटेज की मदद से पत्थर फेंकने वालों की पहचान की जा रही है। एफआईआर फिलहाल अज्ञात लोगों के खिलाफ है, हालांकि पुलिस ने चार से पांच संदिग्धों की पहचान कर ली है।

सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट डीसीपी नितिन वलसन ने कहा, ‘रात में एमसीडी के कर्मचारी जेसीबी लेकर आए थे। हमने लोगों को बताया कि यह कोर्ट का आदेश है और वे इसके खिलाफ अपील कर सकते हैं। उन्होंने अपील की, लेकिन उन्हें स्टे ऑर्डर मिला। 25-30 लोगों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की। जवाबी कार्रवाई में, हमने उन्हें पीछे हटाने के लिए बल का इस्तेमाल किया। इस पत्थरबाज़ी में पांच पुलिस अधिकारी घायल हो गए। उन्हें मामूली चोटें आई हैं। हमने संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है और पांच लोगों को हिरासत में लिया है। तोड़फोड़ का काम एमसीडी कर रही है। जितना काम होना था, उतना हो गया है, और काम अभी भी जारी है। हमने कल ड्रोन कैमरे भी लगाए थे, हम सभी कैमरों की जांच कर रहे हैं।’

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