धनखड़ का इस्तीफा भाजपा के भीतर बदले सत्ता समीकरण को दर्शाता है: पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार

नयी दिल्ली. पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने मंगलवार को कहा कि उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ का अचानक इस्तीफा सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर बदले सत्ता समीकरणों और राजनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि धनखड़ सार्वजनिक जीवन में सक्रिय बने रहेंगे. उन्होंने धनखड़ की प्रशंसा की और कहा कि राज्यसभा के सभापति के रूप में उनकी कमी खलेगी.

उन्होंने कहा, ”उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का अचानक इस्तीफा स्पष्ट रूप से सत्तारूढ़ दल के भीतर बदली हुई राजनीतिक प्राथमिकताओं और सत्ता समीकरणों का प्रतिबिंब है, भले ही उपराष्ट्रपति ने अपने त्यागपत्र में स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया हो.” उन्होंने एक बयान में कहा, ”उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के असली कारण चाहे जो भी रहे हों, राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी के रूप में उनकी कमी खलेगी.” कुमार ने कहा कि विपक्ष द्वारा उनके सार्वजनिक बयानों से असहमति के बावजूद, धनखड़ की सहज अनौपचारिकता, व्यक्तिगत शालीनता, विनम्रता और मित्रों के प्रति सच्ची गर्मजोशी ने उन्हें राजनीतिक क्षितिज पर काफी सम्मान दिलाया है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”राजनीति में कोई पूर्ण विराम नहीं होता, इसलिए उम्मीद है कि जगदीप धनखड़ सार्वजनिक क्षेत्र में सक्रिय रहेंगे और राजनीति में अपना विशिष्ट करियर जारी रखेंगे. उनके अच्छे स्वास्थ्य और भावी जीवन में सफलता की कामना करता हूं.” धनखड़ ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया और गृह मंत्रालय ने उनके इस्तीफे को अधिसूचित कर दिया है.

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