भूमि रिकार्ड के डिजिटलीकरण से पारदर्शिता आयेगी, पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ मिलेगा : मुर्मू

नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जमीन से जुड़े विवादों में एक बड़ी आबादी के उलझे रहने और अदालतों में इन मामलों में अधिक समय लगने का जिक्र करते हुए मंगलवार को कहा कि भूमि रिकार्ड के डिजिटलीकरण तथा सूचना सम्पर्क स्थापित करने की पहल से देश एवं संस्थानों की ऊर्जा अब विकास कार्य में लगेगी.

ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘भूमि सम्मान 2023’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ”आज भूमि सम्मान प्राप्त करने वाले सभी राज्यों और जिलों के अधिकारियों और उनके दल को मैं बधाई देती हूं. मैं आशा करती हूं कि इस सम्मान समारोह से, अन्य राजस्व अधिकारियों को और अधिक लगन के साथ कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी तथा राजस्व प्रशासन के क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी.” राष्ट्रपति ने डिजिटल इंडिया भूमि रिकार्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम लागू करने में उपलब्धियों के लिए नौ राज्यों के सचिवों और 68 जिलाधिकारियों को भूमि सम्मान प्रदान किये.

उन्होंने कहा कि आज भी हमारे गांव की अधिकांश आबादी की आजीविका भूमि संसाधनों से जुड़ी हुई है, ऐसे में एक व्यापक एवं एकीकृत भूमि प्रबंधन प्रणाली देश के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है. राष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटलीकरण को अपनाने से पारर्दिशता बढ़ती है और संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सुविधा होती है. उन्होंने कहा कि इससे अनैतिक एवं गैर कानूनी गतिविधियों पर भी अंकुश लगेगा तथा भूमि रिकार्ड का एक ही पोर्टल उपलब्ध होने से विभिन्न संगठनों और एजेंसियों को जानकारी साझा करने में मदद मिलेगी.

उन्होंने कहा कि भूमि रिकार्ड की विश्वसनीयता बढ़ने से लोग अधिक भरोसे के साथ क्रय-विक्रय की प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे.
मुर्मू ने कहा कि भूमि रिकार्ड के डिजिटलीकरण से पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा. मुर्मू ने कहा, ” डिजिटल इंडिया भूमि रिकार्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम से जुड़े सभी लोग देश के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. केंद्र सरकार द्वारा इस अभियान का शत-प्रतिशत वित्त पोषण बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है. इस कार्यक्रम के सभी आयामों में प्रभावशाली प्रगति हुई है.” राष्ट्रपति ने कहा कि भूमि रिकार्ड से संबंधित जानकारी को नि:शुल्क और सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराने के बहुत से फायदे होंगे, उदाहरण के लिए भूमि के स्वामित्व और उपयोग से जुड़े विवादों का समाधान करने में सहायता मिलेगी.

उन्होंने कहा कि यह एक सर्वविदित तथ्य है कि जमीन से जुड़े विवादों में हमारे देश की बहुत बड़ी आबादी उलझी रहती है तथा प्रशासन एवं न्यायपालिका का बहुत अधिक समय इन मामलों में लग जाता है. उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण तथा सूचना सम्पर्क स्थापित करने की इस पहल से देश के लोगों और संस्थानों की ऊर्जा, विकास में लगेगी, जो ऊर्जा अब तक विवाद में खपती रही है.

राष्ट्रपति ने कहा, ”डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था बहुत विस्तृत हुई है. विश्व के कुल डिजिटल लेनदेन का 46 प्रतिशत भारत में होता है. आज देश के सभी हिस्सों में लोग कारोबार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और मनोरंजन के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर पा रहे हैं. इससे लोगों की जीवन की गुणवत्ता बेहतर हुई है.”

उन्होंने कहा कि आज का यह कार्यक्रम भूमि रिकार्ड और भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में डिजिटल माध्यमों के जरिये लोगों के जीवन को बेहतर बनाने से जुड़ा हुआ है. मुर्मू ने कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई है कि डिजिटल इंडिया भूमि सूचना प्रबंधन प्रणाली के तहत विशिष्ठ भूमि पार्सल पहचान संख्या प्रदान करने की व्यवस्था की जा रही है जो आधार कार्ड की तरह उपयोगी सिद्ध हो सकती है.

उन्होंने कहा कि इससे भूखंडों का सही उपयोग करने, नई योजनाओं की परिकल्पना करने और उनको कार्य रूप प्रदान करने में मदद मिलेगी. राष्ट्रपति ने कहा कि ई-अदालतों को भूमि रिकार्ड तथा पंजीकरण डाटाबेस के साथ जोड़ने के अनेक लाभ होंगे. उन्होंने कहा, ” अब तक कई राज्यों में लोगों एवं विभिन्न संस्थाओं के लिए भूमि रिकार्ड तक पहुंच सुगम हो गई है. मुझे आशा है कि अन्य राज्यों में भी शीघ्र ऐसी सुविधा उपलब्ध हो जायेगी.”

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