
कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) मुख्यालय को कोलकाता से बाहर स्थानांतरित कर सकती है. उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि यहां ऐसा निकाय रहे जो जलाशयों से राज्य में पानी छोड़ता है, जिससे लोगों की मौत होती है. ममता की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत काम करने वाले डीवीसी द्वारा प्रबंधित बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद राज्य के दक्षिणी हिस्से के कई जिले जलमग्न हो गए.
मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, ”उन्हें (केंद्र को) इसे (डीवीसी मुख्यालय) ले जाने दीजिए. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने कोलकाता से सब कुछ हटा दिया है और कुछ भी नहीं बचा है. वे कोलकाता में एक इमारत (डीवीसी मुख्यालय) रखेंगे, लेकिन कोलकाता की बात नहीं सुनेंगे तथा पानी छोड़ना जारी रखेंगे जिससे बंगाल में बाढ़ आएगी और लोग मरेंगे.” उन्होंने कहा कि राज्य में बाढ़ में 28 लोगों ने अपनी जान गंवाई.
बीरभूम के आधिकारिक दौरे पर पहुंची ममता ने कहा, ”हमें ऐसा निकाय नहीं चाहिए, जो पानी छोड़े और लोगों को मारे. डीवीसी की स्थापना लोगों को बाढ़ के कहर से बचाने के लिए की गई थी.” बीरभूम व्यापक पैमाने पर बाढ़ से प्रभावित जिलों में शामिल है. मुख्यमंत्री बनर्जी ने डीवीसी के नियंत्रण वाले बांधों से पानी छोड़े जाने के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया.
उन्होंने कहा, ”(डीवीसी बांधों की) क्षमता सड़कों के स्तर तक कम हो गई है… पिछले 20 वर्षों से ‘ड्रेजिंग’ (जलाशयों के तल से गाद और मलबा हटाने की प्रक्रिया) नहीं हुई है.” ममता बनर्जी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक के बाद एक दो पत्र भेजे, जिसमें बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए हस्तक्षेप करने और केंद्रीय धन जारी करने का आग्रह किया गया था. वह दावा करती रही हैं कि बाढ़ मुख्य रूप से मानव निर्मित है, जो डीवीसी द्वारा अपने बांधों से अनावश्यक रूप से पानी छोड़े जाने के कारण आई थी.
हालांकि, केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने ममता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि डीवीसी के जलाशयों से पानी छोड़ते समय सभी मानदंडों का पालन किया गया था. रविवार को पश्चिम बंगाल सरकार के दो अधिकारियों ने दामोदर घाटी जलाशय विनियमन समिति (डीवीआरआरसी) के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था. पश्चिम बंगाल सरकार ने दावा किया है कि बाढ़ से पूर्व एवं पश्चिम बर्धमान, बीरभूम, बांकुरा, हावड़ा, हुगली और पूर्व एवं पश्चिम मेदिनीपुर जिले प्रभावित हुए हैं.



