जम्मू के जंगलों में छिपे विदेशी आतंकवादियों को मार गिराने के लिए प्रयास जारी: आईजीपी

जम्मू. जम्मू संभाग में हर दिन 100 से अधिक आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए जाने का दावा करते हुए एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि घने जंगलों में विदेशी आतंकवादियों की मौजूदगी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है और उन्हें मार गिराने के प्रयास जारी है.

जम्मू क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) भीम सेन टूटी ने कहा कि आतंकवादी और अपराधी सुरक्षा तंत्र को तोड़ने के प्रयास में ड्रोन जैसी नयी तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियां ??उनसे दो कदम आगे हैं.
टूटी ने देश की खातिर अपने प्राणों की आहुति देने वाले बहादुर र्किमयों को पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर जम्मू रेलवे स्टेशन के पास पुलिस शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के बाद मीडियार्किमयों को संबोधित किया.

यह दिवस केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के उन 10 बहादुर शहीदों की स्मृति में मनाया जाता है जिन्होंने 21 अक्टूबर, 1959 को अपना कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था. उन्होंने 4681 मीटर की ऊंचाई पर लद्दाख के हॉट ्प्रिरंग्स में भारी हथियारों से लैस चीनी सैनिकों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में अपने प्राणों की आहुति दी थी.

जम्मू पुलिस प्रमुख ने कहा, ”पिछले दो साल से विदेशी आतंकवादी (जम्मू में) एक बड़ी चुनौती रहे हैं. लेकिन हम अपने आतंकवाद-रोधी अभियान और सीमा सुरक्षा तंत्र को मजबूत कर रहे हैं. मुझे उम्मीद है कि जल्द हम जंगलों में छिपे विदेशी आतंकवादियों से निपटने और उन्हें मार गिराने में सक्षम होंगे.” उन्होंने कहा कि जम्मू क्षेत्र में हर दिन लगभग 120 आतंकवाद-रोधी अभियान चलाए जाते हैं. उन्होंने कहा, ”यह हमारा दैनिक कर्तव्य है, चाहे वह कोई अभ्यास हो या सटीक सूचना-आधारित अभियान, यह निरंतर जारी रहता है.” उन्होंने कहा कि आतंकवाद से लड़ना उनके कर्तव्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

टूटी ने कहा, ”जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद से लड़ते हुए जितने लोग शहीद हुए हैं वह हमारे कर्तव्य का एक हिस्सा मात्र है. इसके अलावा हम अन्य कर्तव्य भी निभाते हैं. उदाहरण के लिए हमें उन साथियों को नहीं भूलना चाहिए जो यातायात ड्यूटी करते हुए कुचले जाने के कारण या अपराधियों से लड़ते हुए शहीद हुए हैं. आतंकवाद से लड़ना एक प्रमुख कर्तव्य है लेकिन इसके कई व्यापक पहलू हैं. हम अपने सभी शहीद बहादुर साथियों को सलाम करते हैं.” देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी पुलिसर्किमयों को श्रद्धांजलि देते हुए आईजीपी ने कहा कि पुलिस बल उनके परिवारों के प्रति सदैव कृतज्ञ है.

आईजीपी ने कहा, ”रणनीति और तरकीबों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं की जा सकती लेकिन मैं लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जम्मू कश्मीर पुलिस अपने कर्तव्य और जिम्मेदारी से अवगत है तथा लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी.” आतंकवादियों द्वारा ड्रोन जैसी तकनीक के इस्तेमाल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वे आधुनिक उपकरणों को अपनाने में भी पीछे नहीं हैं.

पुलिस अधिकारी ने कहा, ”आतंकवादी और अपराधी सुरक्षा तंत्र को तोड़ने के लिए अपनी रणनीति बदल रहे हैं लेकिन हम जवाबी कदम उठा रहे हैं और हमारा प्रयास उनसे दो कदम आगे रहने का है.” उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पुलिस व्यवस्था में बदलाव आया है और उनका ध्यान कुशल एवं प्रभावी पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम लागत पर ”डाटा-आधारित और साक्ष्य-आधारित” पुलिस प्रणाली विकसित करना है.

उन्होंने कहा, ”हमारा काम आंतरिक सुरक्षा बनाए रखना है और हम अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए कोई भी बलिदान देने को तैयार हैं. हम पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से आतंकवाद से लड़ रहे हैं और जब तक इसका पूरी तरह से सफाया नहीं हो जाता हम इस खतरे से लड़ते रहेंगे.” पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर जम्मू कश्मीर पुलिस ने सोमवार को पुलिस मुख्यालय में रक्तदान शिविर का आयोजन किया. जम्मू क्षेत्र की विभिन्न शाखाओं, बटालियनों और जिला इकाइयों के कुल 125 र्किमयों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया. इस बीच जम्मू के सभी दस जिलों में स्मृति समारोह आयोजित किए गए जिनमें बड़ी संख्या में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी, शहीदों के परिवारों के सदस्यों और नागरिक संगठन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button