
नयी दिल्ली: बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद संतृप्त मिश्र ने शनिवार को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर ंिचता जताई और कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली के वित्तपोषण और समर्थन के लिए कई वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध हैं।
मिश्र ने कहा कि सरकार आसानी से यूपीआई नेटवर्क के रखरखाव का खर्च उठा सकती थी। ओडिशा से राज्यसभा सदस्य मिश्र ने यहां कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, “2025-26 में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये का लाभांश दिया।
इसमें से एक छोटा हिस्सा डिजिटल लेनदेन के बुनियादी ढांचे के लिए अलग रखा जा सकता था।” उन्होंने यह भी कहा कि यूपीआई का संचालन करने वाले भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के शेयरधारकों और प्रवर्तकों में बड़े वित्तीय बैंक व मंच शामिल हैं।
मिश्र ने कहा कि इन बैंकों ने पिछले साल 2.5 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था और डिजिटल लेनदेन के बुनियादी ढांचे के लिए वे इस राशि का एक छोटा हिस्सा प्रदान कर सकते थे।
उन्होंने कहा कि 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू करने से व्यापारियों को या तो अपने लाभ मार्जिन में कमी करनी पड़ेगी या फिर इसका बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ेगा। मिश्र ने कहा, “सरकार कहती है कि एमडीआर का असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह अर्थशास्त्र की पूरी तरह गलत समझ है।” व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क 15 अक्टूबर से लागू होगा।



