
नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग (ईसी) ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस दावे पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कर्नाटक की एक विधानसभा सीट पर आयोग पर “धोखाधड़ी की अनुमति देने” का आरोप लगाया था. आयोग ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता ने न केवल “बेबुनियाद आरोप” लगाए, बल्कि एक संवैधानिक संस्था को “धमकाने” का भी प्रयास किया.
गांधी ने कहा कि कांग्रेस के पास इस बात के ” ठोस एवं सौ प्रतिशत ठोस” हैं कि निर्वाचन आयोग ने कर्नाटक की एक विधानसभा सीट पर “धोखाधड़ी की अनुमति दी”. उन्होंने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा, “आप इससे बच नहीं पाएंगे, क्योंकि हम आपका पीछा नहीं छोड़ने वाले.” गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए निर्वाचन आयोग ने कहा कि जहां तक कर्नाटक चुनावों का सवाल है, यह “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 80 के अनुसार चुनाव याचिका दायर करने, या यदि दायर की गई है तो उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करने के बजाय, उन्होंने न केवल “निराधार आरोप” लगाए, बल्कि एक संवैधानिक संस्था यानी निर्वाचन आयोग को “धमकी देने” का विकल्प भी चुना है.
गांधी ने आरोप लगाया कि ईसी भारत के निर्वाचन आयोग के रूप में काम नहीं कर रहा और ”अपना दायित्व नहीं निभा रहा”.
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और बिहार विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का विकल्प खुले होने से संबंधित राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव की कथित टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर गांधी ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा कि उनकी पार्टी के पास कर्नाटक में एक सीट पर धोखाधड़ी की अनुमति दिए जाने के ” ठोस एवं 100 प्रतिशत सबूत” हैं.
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, “हमने सिर्फ एक निर्वाचन क्षेत्र का जायजा लिया और हमें ये सब मिला. मैं पूरी तरह आश्वस्त हूं कि एक के बाद एक सीट पर यही यही नाटक चल रहा है… मैं निर्वाचन आयोग को एक संदेश देना चाहता हूं — अगर आपको लगता है कि आप इससे बच निकलेंगे, अगर आपके अधिकारी सोचते हैं कि वे इससे बच जाएंगे, तो आप गलतफहमी में हैं. आप इससे बच नहीं पाएंगे क्योंकि हम आपका पीछा नहीं छोड़ने वाले.”
मृत, स्थायी रूप से पलायन कर चुके लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं रह सकते: सीईसी कुमार
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि आयोग किसी प्रभाव में आकर मृतकों, स्थायी रूप से पलायन कर चुके लोगों या कई जगहों पर मतदाता के रूप में दर्ज लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं होने दे सकता. उनकी यह टिप्पणी विपक्षी दलों द्वारा बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर आयोग पर बढ़ते हमलों के बीच आई है. विपक्ष का दावा है कि इस कदम से करोड़ों पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित हो जाएंगे.
आयोग के अनुसार, उन्होंने कहा, ”क्या निर्वाचन आयोग द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से तैयार की जा रही शुद्ध मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव और मजबूत लोकतंत्र की नींव नहीं है?” उन्होंने कहा कि पहले बिहार में और बाद में पूरे देश में अपात्र लोगों को वोट देने की अनुमति देना संविधान के विरुद्ध है.
उन्होंने रेखांकित किया, ”इन सवालों पर, किसी न किसी दिन, हम सभी और भारत के सभी नागरिकों को राजनीतिक विचारधाराओं से परे जाकर गहराई से सोचना होगा.” बिहार में मतदाता सूची के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत घर-घर जाकर जांच करने पर निर्वाचन अधिकारियों ने अब तक पाया है कि 52 लाख से अधिक मतदाता अपने पते पर मौजूद नहीं थे और 18 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है.
आयोग ने बताया है कि एसआईआर के निर्देशों के अनुसार, किसी भी मतदाता या किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल को 1 अगस्त से 1 सितंबर तक एक महीने का समय मिलेगा ताकि वे निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) और पार्टियों के बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) द्वारा छोड़ दिये गए किसी भी पात्र मतदाता का नाम शामिल करवा सकें या बीएलओ/बीएलए द्वारा गलत तरीके से शामिल किए गए किसी मतदाता का नाम हटवा सकें.



