
गोपेश्वर/देहरादून. उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक जल-मल शोधन संयंत्र (एसटीपी) में बिजली का करंट फैल जाने से 16 लोगों की मौत हो गई जबकि सात अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस ने यह जानकारी दी. चमोली के पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि इनमें से एक की मृत्यु मंगलवार रात को करंट फैलने के बाद उसकी चपेट में आकर हुई. उन्होंने बताया कि अलकनंदा नदी के किनारे नमामि गंगे परियोजना के तहत बने एसटीपी में कार्यरत उक्त व्यक्ति के पंचनामे के दौरान बुधवार सुबह करीब साढ.े ग्यारह बजे फिर से एसटीपी की रेलिंग में करंट दौड़ गया और मौके पर मौजूद पुलिसर्किमयों समेत मृतक के कुछ रिश्तेदार इसकी चपेट में आ गए.
उन्होंने बताया कि करंट इतना तेज था कि कई लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. डोबाल ने बताया कि बुधवार को 15 लोगों की मौत हुई जिनमें एक पुलिस उपनिरीक्षक प्रदीप रावत और होमगार्ड के तीन जवान शामिल हैं. प्लांट की रेलिंग में बिजली का करंट फैलने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्थिति का जायजा लेने तथा हादसे से पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए घटनास्थल की ओर रवाना हो गए हैं. उन्होंने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए अधिकारियों को मृतकों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 1-1 लाख रुपये की सहायता राशि अविलंब देने का निर्देश दिया है. धामी ने दुर्घटना की मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया है और कहा कि हादसे के लिए दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद चमोली के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने अपर जिलाधिकारी डॉ अभिषेक त्रिपाठी को जांच अधिकारी नामित करते हुए उन्हें एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आदेश दिया है. जिलाधिकारी ने त्रिपाठी को अपनी जांच में दुर्घटना के कारणों और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचने और उन्हें रोकने के लिए उपाय व सुझावों को भी शामिल करने को कहा है.
चमोली के मुख्य विकास अधिकारी डॉ ललित नारायण मिश्र ने बताया कि घायलों को हेलिकाप्टर से एम्स, ऋषिकेश भेजा जा रहा है.
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी फोन पर मुख्यमंत्री से घटना के विषय में जानकारी ली. उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक कुमार ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि इसमें पुलिस एक उपनिरीक्षक और तीन होमगार्ड जवानों की मृत्यु हुई है. उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना करते हुए शोक-संतप्त परिवारों को दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से कामना की.
शटडाउन वापस लेने के बाद हुआ हादसा : उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन
उत्तराखंड के चमोली जिले के जल मल शोधन संयंत्र (एसटीपी) में बुधवार को हुए दर्दनाक हादसे के बाद उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (उपाकालि) ने माना कि हादसा फीडर के जम्पर को लगाने के लिए लिया गया शटडाउन वापस लेने के बाद हुआ. हालांकि, उपाकालि द्वारा यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मामले की गहन जांच के बाद ही वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा.
विज्ञप्ति में उपाकालि के निदेशक (परिचालन) एमएल प्रसाद से मिली प्रारंभिक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि चमोली पुल के पास 11 केवी निजमुला फीडर से एसटीपी का 20 किलोवाट का संयोजन है. लाइनमैन द्वारा फीडर की गश्त के दौरान बीच में, जहां एसटीपी पड़ता है, के समीप खंभे पर एक जम्पर निकला पड़ा पाया गया.
इस जम्पर को लगाने के लिए सुबह 11:15 से 11.35 के बीच शटडाउन लिया गया था. विज्ञप्ति के मुताबिक, शटडाउन वापस लेने के पश्चात पता चला कि एसटीपी में करंट फैलने से दुर्घटना हो गयी. विज्ञप्ति में कहा गया है कि चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर में तैनात अधीशासी अभियंता ने बताया कि मंगलवार को एसटीपी में हुई दुर्घटना के बारे में उपाकालि को जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि मृतक के पंचनामा और पोस्टमार्टम के लिए पुलिस तथा अन्य कई लोग सुबह एसटीपी परिसर में एकत्रित हुए थे और उनके ऑपरेटर द्वारा मेनस्विच चालू करने के उपरांत टीनशेड के आसपास करंट फैल गया और वहां मौजूद लोगों के साथ हादसा हुआ.
उन्होंने जोर देकर कहा कि उक्त स्थान पर स्थापित ट्रांसफार्मर एवं एसटीपी के परिसर में स्थापित विद्युत मीटर में प्रथमद्रष्टया कोई कमी नहीं है और संभवत: मीटर से आगे परिसर में ही कोई आंतरिक दोषा था. विज्ञप्ति में बताया गया है कि प्रसाद तथा मुख्य अभियंता, वितरण, गढ.वाल क्षेत्र घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं तथा प्रारंभिक मुआवजे के तौर पर 25 लाख रुपये की राशि उपाकालि मुख्यालय से तत्काल जारी कर दी गयी है. इस संबंध में पूछे जाने पर उपाकालि के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि हम अपनी ओर से पूरी जानकारी प्रेस विज्ञप्ति में दे चुके हैं.



