उच्चतर न्यायपालिका की अंग्रेजी भाषा व ‘खर्च’ न्याय तक समान पहुंच की राह में बाधा: राष्ट्रपति मुर्मू

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 28 Nov 2023 08:44 PM
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नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि उच्चतर न्यायपालिका में अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल और वहां का ‘खर्च’ न्याय तक समान पहुंच की राह की बाधाओं में शामिल हैं. उन्होंने इन बाधाओं को हटाने पर जोर दिया. यहां एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और सामाजिक रूप से वंचित समूहों के लोगों के बीच जागरूकता अभियान शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि उन्हें अपने अधिकारों से अवगत कराया जा सके.

मुर्मू ने कहा, ”समानता न सिर्फ न्याय की बुनियाद है, बल्कि उसकी एक जरूरी शर्त भी है.” उन्होंने कहा, ”बहुत समय हो गया जब दुनिया ने यह घोषणा की थी कि सभी मनुष्य समान हैं, लेकिन हमें खुद से पूछने की जरूरत है कि क्या हम सभी को न्याय तक समान पहुंच प्राप्त है.” राष्ट्रपति ने कहा कि व्यवहार में, इसका मतलब यह है कि कुछ लोग अक्सर कई कारकों के कारण अपनी शिकायतों के निवारण में असमर्थ होते हैं. मुर्मू ने यहां ”कमजोर लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण कानूनी सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करना: ग्लोबल साउथ में चुनौतियां और अवसर’ विषय पर आयोजित पहले क्षेत्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया.

इस दौरान उन्होंने कहा, ”हमारा प्रमुख काम उन अवरोधकों को हटाना है. स्वाभाविक रूप से सबसे बड़ा अवरोधक अक्सर न्याय प्राप्त करने पर आने वाला खर्च है.” उन्होंने कहा कि सभी के लिए न्याय तक पहुंच उनके दिल के करीब का विषय रहा है. उन्होंने समाज के आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को उपचारात्मक कार्रवाई के लिए कानूनी संस्थानों से संपर्क करने में मदद के लिए उठाए गए कई कदमों का उल्लेख किया.

By Yogesh Kumar Sahu