प्रसिद्ध हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे का निधन

रायपुर. छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध हास्य कवि एवं पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सुरेन्द्र दुबे का बृहस्पतिवार को यहां दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. कवि ने एक सरकारी अस्पताल में अंतिम सांस ली. अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ स्मित श्रीवास्तव ने संवाददाताओं को बताया कि 72 वर्षीय दुबे को बुधवार तड़के दिल का दौरा पड़ने के बाद एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में भर्ती कराया गया था, जहां बृहस्पतिवार दोपहर उनका निधन हो गया.

श्रीवास्तव ने बताया, ”बुधवार को उनकी एंजियोप्लास्टी सफलतापूर्वक की गई थी, जिसके बाद उनकी हालत स्थिर थी. शायद वह गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में थोड़ा विचलित थे. आज सुबह उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया गया जिससे वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ सहज हो सकें. लेकिन, वहां भी वह विचलित थे और इस दौरान उनमें छटपटाहट थी.” डॉक्टर श्रीवास्तव ने बताया कि आज दोपहर उन्हें दो बार दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उनका निधन हो गया.

वर्ष 1953 में बेमेतरा जिले (तत्कालीन दुर्ग जिले) में जन्मे डॉ. सुरेन्द्र दुबे को 2010 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. डॉ. दुबे पेशे से आयुर्वेदिक चिकित्सक थे और लोगों के बीच ‘हास्य कवि’ के नाम से मशहूर थे. उनके परिवार में पत्नी शशि दुबे, एक बेटा और एक बेटी है. उनके निधन पर विभिन्न क्षेत्रों के लोगों शोक व्यक्त किया है.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दुबे के निधन पर दुख व्यक्त किया और उन्हें छत्तीसगढ़ी साहित्य तथा हास्य कविता का शिखर बताया.
साय ने ‘एक्स’ पर एक शोक संदेश में लिखा, ”छत्तीसगढ़ी साहित्य व हास्य काव्य के शिखर पुरुष, पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे जी का निधन साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. अचानक मिली उनके निधन की सूचना से स्तब्ध हूं. अपने विलक्षण हास्य, तीक्ष्ण व्यंग्य और अनूठी रचनात्मकता से उन्होंने न केवल देश-विदेश के मंचों को गौरवान्वित किया, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा को वैश्विक पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई. जीवनपर्यंत उन्होंने समाज को हंसी का उजास दिया, लेकिन आज उनका जाना हम सभी को गहरे शोक में डुबो गया है. उनकी जीवंतता, ऊर्जा और साहित्य के प्रति समर्पण सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा.” साय ने लिखा, ”ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं शोकाकुल परिजनों और असंख्य प्रशंसकों को इस दु?ख की घड़ी में संबल प्रदान करें. ॐ शांति!”

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