प्रतिस्पर्धा के बजाय पूरक बनाने वाले व्यापार समझौतों पर ध्यान: गोयल

लंदन. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत उन देशों के साथ व्यापार वार्ता कर रहा है जिनके साथ उसकी सीधी प्रतिस्पर्धा नहीं है, बल्कि जिनकी अर्थव्यवस्थाएं पूरक बन सकती हैं. गोयल ने विज्ञान संग्रहालय में ब्रिटेन-भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सहयोग पर आयोजित एक सत्र को संबोधित करते हुए व्यापार समझौतों से खुलने वाले द्विपक्षीय और व्यापक वैश्विक अवसरों का उल्लेख किया.

गोयल ने कहा, “हमारा ध्यान विकसित देशों के साथ मजबूत व्यापार समझौते करने पर है.” उन्होंने अपने संबोधन में ब्रिटेन-भारत मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के साथ ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ किए गए व्यापार समझौतों का भी उल्लेख किया. गोयल ने कहा कि 15 साल पहले जब उनकी पार्टी की सरकार सत्ता में नहीं आई थी, तब भारत ‘प्रतिस्पर्धी’ देशों के साथ व्यापार समझौते करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा था.

उन्होंने कहा, “यह वाकई में मूर्खतापूर्ण है क्योंकि (यह) मेरे बाजार को मेरे प्रति्स्पिपधयों के लिए खोल रहा है, जिनमें से कई अब चीन की ‘बी’ टीम बन गए हैं. इसलिए प्रभावी रूप से और अप्रत्यक्ष रूप से, मैंने अपने बाजार को उन वस्तुओं के लिए खोल दिया है जो चीन से भारत में आती हैं.” गोयल ने अमेरिका, न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ (ईयू) और खाड़ी देशों के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं का संदर्भ देते हुए कहा, “हम उन देशों के साथ बात कर रहे हैं जिनके साथ हम प्रतिस्पर्धा नहीं करते हैं, जिनके साथ हम एक-दूसरे के पूरक हैं; जहां उनके पास पेशकश के लिए कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें भारत भी पसंद करेगा, जैसा कि ब्रिटेन से समझौते में है, और हमारे पास पेशकश करने के लिए कुछ चीजें हैं. हम उनकी अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं.”

उन्होंने कहा, “इसलिए, ये समझौते हमें एक अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित होने में मदद करेंगे, हमारे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सही उपकरण, सही सक्षम वातावरण प्राप्त करने में मदद करेंगे. हमारा प्रयास सहयोग, सह-निर्माण, सह-संचालन और सह-डिजाइन करना है. आइए, लोकतांत्रिक विश्व के मित्रों और सहयोगियों के रूप में मिलकर काम करें.” विज्ञान संग्रहालय के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी सर इयान ब्लैचफोर्ड के साथ विस्तृत चर्चा के दौरान गोयल ने ब्रिटेन के साथ हाल ही में संपन्न एफटीए के साथ इस क्षेत्र के लिए बड़ी कामयाबी पर प्रकाश डाला, जब भारत अगले 10-15 वर्षों में नवाचार पारिस्थितिकी में “बड़े पैमाने पर निवेश” करने के लिए तैयार है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button