ब्रह्मोस मिसाइल केंद्र के पूर्व वैज्ञानिक सात साल बाद जेल से बाहर आए

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 03 Dec 2025 09:19 PM
ब्रह्मोस मिसाइल केंद्र के पूर्व वैज्ञानिक सात साल बाद जेल से बाहर आए
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नागपुर. पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोपों से मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा मुक्त किये जाने के बाद, पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक निशांत अग्रवाल मंगलवार देर रात नागपुर केंद्रीय कारागार से रिहा कर दिये गए. अग्रवाल ब्रह्मोस मिसाइल केंद्र में काम करते थे. उन्हें सात साल जेल में बिताने पड़े, जिससे उनका करियर जोखिम में पड़ गया, क्योंकि बिना उचित जांच-पड़ताल के विदेश में नौकरी के अवसर तलाशने की उनकी गलती उन्हें भारी पड़ी.

मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में चली कानूनी लड़ाई, अग्रवाल पर ‘इरादतन अपराध करने’ के आरोपों के ईद-गिर्द केंद्रित थी. उन्हें 2018 में शासकीय गोपनीयता कानून और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था.
उनके वकील चैतन्य बी. बर्वे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”हां, वह मंगलवार रात नागपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ गए.” हालांकि, वर्ष 2017-18 के लिए ‘युवा वैज्ञानिक पुरस्कार’ प्राप्त करने वाले अग्रवाल (34) से उनकी रिहाई के संबंध में बात नहीं हो सकी, लेकिन उनके एक करीबी रिश्तेदार ने कहा कि परिवार देश की न्याय प्रणाली का आभारी है और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन सभी को राहत मिली है.

उन्होंने कहा, ”वह फिर से अपनी राह पकड़ लेंगे क्योंकि वह जीवन भर एक योद्धा रहे हैं.” अग्रवाल की मुश्किलें उस वक्त शुरू हुई थीं, जब उन्होंने ‘लिंक्डइन’ पर अपना बायोडाटा अपलोड किया था. उन्होंने सेजल कपूर नाम की एक महिला द्वारा भेजे गए अनुरोध पर ऐसा किया था, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह अकाउंट पाकिस्तान से संचालित हो रहा है. बर्वे ने उच्च न्यायालय के फैसले का सारांश प्रस्तुत करते हुए कहा कि अदालत में पेश किये गए सभी साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद, अभियोजन पक्ष (अग्रवाल के) मकसद को स्थापित करने में विफल रहा. अदालत में अग्रवाल का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील मनोहर ने भी किया.

न्यायमूर्ति अनिल एस किलोर और न्यायमूर्ति प्रवीण एस पाटिल की खंडपीठ ने अपने 49 पृष्ठ के फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाह एन एन कुमार, जो ब्रह्मोस एयरोस्पेस में कार्यकारी निदेशक (उत्पादन) के रूप में कार्यरत हैं, ने उल्लेख किया था कि अग्रवाल एलन अब्राहम के अधीन प्रशिक्षु के रूप में काम कर रहे थे और प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत उन दोनों को कार्यालय से कुछ किलोमीटर दूर स्थित उनके गेस्ट हाउस में परियोजनाएं तैयार करनी होती थीं.

अभियोजन पक्ष द्वारा लगाये गए मोहपाश (हनी ट्रैप) के आरोप पर अदालत ने कहा कि वह गलत संचार होने या सूचना हस्तांतरित किये जाने की बात स्थापित करने में नाकाम रहा और यह स्थापित नहीं हुआ है कि आरोपी ने जानबूझकर संचार किया था. उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ अदालत के फैसले को रद्द करते हुए अग्रवाल को केवल एक आरोप – शासकीय गोपनीयता अधिनियम (ओएसए) की धारा 5(1)(डी) के अलावा सभी आरोपों से मुक्त कर दिया. इस धारा के तहत आरोप उचित सावधानी बरतने में विफलता या सेजल कपूर के निर्देश पर कथित मैलवेयर डाउनलोड करने के लिए अग्रवाल के आचरण से संबंधित है.

उच्च न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष ओएसए अधिनियम में परिभाषित ”गलत संचार” या ”किसी भी जानकारी” को हस्तांतरित करने को साबित करने में विफल रहा और ऐसा कोई सबूत नहीं था जिससे पता चले कि आरोपी ने जानबूझकर ”किसी अन्य देश के लाभ के लिए या राष्ट्र की सुरक्षा के लिए किसी अन्य तरीके से” कोई सामग्री हस्तांतरित की या उसका उपयोग किया.

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