वित्त मंत्री को गडकरी का पत्र आंतरिक असंतोष का संकेत: कांग्रेस

निवेश को लेकर विपक्ष पर वित्त मंत्री का आरोप उनकी हताशा का प्रमाण : कांग्रेस

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे गए एक पत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर कटाक्ष करते हुए बुधवार को कहा कि यह आंतरिक असंतोष और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ नाराजगी का संकेत है.

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”बजट पर वित्त मंत्री को नितिन जयराम गडकरी का पत्र निश्चित रूप से आंतरिक असंतोष और ”नॉन बायोलॉजिकल” प्रधानमंत्री के खिलाफ नाराजगी का संकेत है.” केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से जीवन एवं चिकित्सा बीमा प्रीमियम पर 18 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को हटाने का अनुरोध किया है.

वित्त मंत्री को लिखे पत्र में गडकरी ने नागपुर मंडल जीवन बीमा निगम कर्मचारी संघ की चिंताओं को उठाया, जिसने बीमा उद्योग के मुद्दों के संबंध में उन्हें एक ज्ञापन सौंपा था. ज्ञापन का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा, ”जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी लगाना जीवन की अनिश्चितताओं पर कर लगाने के समान है. कर्मचारी संघ का मानना है कि जो व्यक्ति परिवार को सुरक्षा देने के लिए जीवन की अनिश्चितताओं के जोखिम को ‘कवर’ करता है, उससे ‘कवर’ खरीदने के लिए प्रीमियम पर कर नहीं लिया जाना चाहिए.”

निवेश को लेकर विपक्ष पर वित्त मंत्री का आरोप उनकी हताशा का प्रमाण : कांग्रेस

कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह दावा उनकी हताशा को दर्शाता है कि निजी निवेश को रोकने के लिए कांग्रेस द्वारा दुष्प्रचार किया जा रहा है. लोकसभा में मंगलवार को बजट पर चर्चा का जवाब दे रहीं सीतारमण ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने और विदेशी निवेशकों को यह संदेश देने की साजिश रची जा रही है कि देश निवेश के लिए सुरक्षित नहीं है.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने वित्त मंत्री पर पलटवार करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”भारत में निजी निवेश (घरेलू और विदेशी दोनों) जो भारत के आर्थिक विकास की गति को तेज. करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, अभी भी बेहद सुस्त है और इसमें वृद्धि नहीं हो रही है. कॉरपोरेट कर में भारी कटौती और नॉन-बायलॉजिकल प्रधानमंत्री एवं उनके ‘चीयरलीडर्स’ और उनके लिए ढोल पीटने वालों के आक्रामक पीआर के बावजूद यह स्थिति है.”

उन्होंने कहा, ”वित्त मंत्री ने निजी निवेश को रोकने के लिए कांग्रेस के तथाकथित दुष्प्रचार को जिम्मेदार ठहराया है. यह स्पष्ट रूप से उनकी हताशा को दर्शाता है. उन्हें लगता है कि बोर्ड रूम में निवेश के फैसले मुख्य विपक्षी दल की बातों से तय होते हैं, न कि सत्ता में बैठी सरकार के कार्यों से.” रमेश के मुताबिक, ”उन्हें याद दिला दें कि पिछले दशक में निजी निवेश में गिरावट के वास्तविक कारण क्या हैं.” उन्होंने दावा किया कि अनिश्चित नीति निर्माण मुख्य कारण है, जो नोटबंदी, असफल जीएसटी के कार्यान्वयन और बिना किसी तैयारी के लगाए गए कोविड-19 लॉकडाउन से हुआ है.

रमेश ने कहा, ”बड़े पैमाने पर मित्र पूंजीवाद को बढ़ावा देने के कारण अल्पाधिकारवाद (कुछ कंपनियों के वर्चस्व) में वृद्धि हुई है और प्रतिस्पर्धा के लिए जगह सीमित हो गई है. ईडी, आयकर विभाग और सीबीआई के ‘रेड राज’ के कारण व्यापारियों को भारत में निवेश बढ़ाने से डर लगता है.”

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