
सबसे पहले एक साफ बर्तन में पानी लें और पूजा के स्थान पर रख दें।
जहाँ आपने पूजा का मंडप या स्थान तैयार किया है, वहां एक चटाई या आसन बिछाकर शांत मन से बैठ जाएं।
फिर हाथ में थोड़ी सी कुशा (घास) और जल लें, और यह मंत्र बोलें:
“ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः।।”
इसके बाद, उस जल को हल्के से अपने ऊपर और पूजा की सभी चीजों पर छिड़क दें, ताकि वे भी शुद्ध हो जाएं।
फिर तीन बार कुल्ला करें ताकि मुख भी स्वच्छ हो जाए।
अब हाथ में थोड़ा जल लें और यह मंत्र बोलते हुए तीन बार थोड़ा-थोड़ा जल अपने मुंह में डालें:
“ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ हृषीकेशाय नमः”
इसके बाद हाथ धो लें।
अब पूजा स्थल पर जहां गणेश जी को स्थापित करना है, वहां थोड़े से साबूत (बिना टूटे) चावल रखें।
फिर उस चावल पर गणेश जी की मूर्ति को आदरपूर्वक स्थापित करें।



