अध्यादेशों के माध्यम से शासन करना लोकतंत्र के लिए सही नहीं : केरल के राज्यपाल

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 08 Aug 2022 06:44 PM
अध्यादेशों के माध्यम से शासन करना लोकतंत्र के लिए सही नहीं : केरल के राज्यपाल
ऑडियो सुनें

तिरुवनंतपुरम/नयी दिल्ली. वाम सरकार द्वारा जारी केरल लोकायुक्त (संशोधन) अध्यादेश सहित कई अध्यादेशों की अवधि सोमवार को समाप्त हो रही है, जिस पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि ऐसे माध्यमों से शासन करना लोकतंत्र के लिए सही नहीं है. खान ने कहा कि वह अध्यादेशों पर विचार किए बिना उनकी अवधि नहीं बढ़ाएंगे. उन्होंने कहा कि जिस दिन वह ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ समिति की बैठक में हिस्सा लेने के लिए केरल से दिल्ली के लिए रवाना हो रहे थे, उस दिन उन्हें 13-14 अध्यादेश भेजे गए थे और उनके पास उन सभी पर गौर करने का समय नहीं था.

राज्यपाल ने राष्ट्रीय राजधानी में पत्रकारों से कहा, ‘‘मुझे उन्हें पढ़ने के लिए समय चाहिए. मुझे उन पर विचार करना होगा. क्या आप चाहते हैं कि मैं बिना सोचे-समझे उन पर हस्ताक्षर कर दूं? हमें लोकतंत्र की भावना को बनाए रखना चाहिए और अध्यादेशों के माध्यम से शासन करना कोई ऐसी चीज नहीं है, जो लोकतंत्र के लिए सही है.’’ खान ने कहा, ‘‘ विशेष आपात स्थितियों में आप अध्यादेश ला सकते हैं. इसके बाद विधानसभा सत्र में इसे पारित किया जाता है. ऐसा नहीं हो सकता कि आप बार-बार अध्यादेश लाते रहें. यदि आप अध्यादेशों के माध्यम से शासन करेंगे तो विधानसभा किस लिए है?’’ उन्होंने कहा कि इस मामले में ऐसी आपात स्थिति क्या है, इसे लेकर कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई गई है.

राज्यपाल ने एक बार फिर दोहराया कि वह सही से विचार किए बिना अध्यादेशों पर निर्णय नहीं करेंगे और उसके लिए उन्हें समय चाहिए. खान ने कहा, ‘‘मुझे पर्याप्त समय दें. एक दिन में ही ये सभी अध्यादेश भेजने की क्या जरूरत है? जल्दबाजी क्या है? मैं कोई जल्दबाजी नहीं करूंगा.’’ खान ने कहा, ‘‘राज्यपाल यह सुनिश्चित करने के लिए है कि राज्य संविधान और कानून के अनुसार चले. अगर मैं संविधान की भावना के अनुसार व्यवहार नहीं करूंगा तो मैं दूसरों से इसकी उम्मीद कैसे कर सकता हूं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘संविधान की भावना के तहत कोई भी सरकार अध्यादेशों के माध्यम से लंबे समय तक शासन नहीं कर सकती है. यहां तक कि उच्चतम न्यायालय ने भी अध्यादेशों को जारी रखने के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है.’’ यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने अभी तक इसलिए अध्यादेशों पर हस्ताक्षर नहीं किए, क्योंकि वह राज्य सरकार के कुलाधिपति के रूप में उनकी शक्तियों को कम करने के लिए अध्यादेश लाने के कथित प्रस्ताव से नाखुश थे? राज्यपाल ने जवाब में कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके और राज्य सरकार के बीच कोई लड़ाई नहीं है.

खान ने कहा कि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने आश्वासन दिया है कि विश्वविद्यालयों के कामकाज के संबंध में कुलाधिपति की शक्तियों में राज्य सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा. राज्यपाल ने बताया कि वह महाराष्ट्र में एक पुरस्कार समारोह में शिरकत करने जाएंगे और 10 अगस्त को केरल लौटेंगे.

केरल लोकायुक्त (संशोधन) अध्यादेश में यह प्रावधान है कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री या राज्य सरकार सक्षम प्राधिकार होंगे और वे लोकायुक्त की घोषणा को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं. राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) केरल लोकायुक्त (संशोधन) अध्यादेश के खिलाफ है और उसने फरवरी में राज्यपाल से दोबारा इस पर हस्ताक्षर नहीं करने का आग्रह किया था.

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Yogesh Kumar Sahu