नयी दिल्ली. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने रविवार को सरकार पर आम लोगों पर कर का अधिक बोझ डालने और अपने ‘‘मित्रों’’ के कर में कमी करने का आरोप लगाया. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने ट्विटर पर एक ‘ग्राफ’ भी साझा किया और आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों से अधिक कर वसूल कर रही है, जबकि कॉरपोरेट से कम कर की वसूली हो रही है.
उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘लोगों पर करों का बोझ बढ़ाया गया, जबकि ‘मित्रों’ के लिए करों में कटौती की गई – सूट-बूट-लूट सरकार के कामकाज का ‘स्वाभाविक तरीका’.’’ राहुल गांधी द्वारा साझा किए गए ग्राफ में कांग्रेस शासन और भाजपा सरकार के दौरान कर वसूली का तुलनात्मक विवरण दर्शाया गया है, जिसमें कहा गया है, ‘‘लोगों पर कम कर बनाम लोगों पर अधिक कर.’’ ग्राफ में दर्शाया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में कॉरपोरेट कर में कमी आई है, जबकि आम लोगों पर कर का बोझ बढ़ा है. इसमें यह भी दिखाया गया है कि सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों से एकत्रित राजस्व का प्रतिशत आम लोगों से अधिक, जबकि कॉरपोरेट से कम है.
ग्राफ में दिखाया गया है कि 2010 में कॉरपोरेट पर लगे कर से एकत्रित राजस्व 40 फीसदी से अधिक था, जबकि आम लोगों से 24 फीसदी कर वसूली की गई थी. इसमें दर्शाया गया है कि 2021 में कॉरपोरेट पर कर से राजस्व की वसूली घटकर 24 फीसदी रह गई, जबकि आम लोगों से 48 फीसदी कर राजस्व वसूला गया.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक पत्र को साझा किया है, जिसमें आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी में बढ़ोतरी का विरोध किया गया है. रमेश ने पत्र साझा करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस दावे का खंडन किया कि किसी भी राज्य ने जीएसटी परिषद की बैठक में खाद्य पदार्थों पर जीएसटी का विरोध नहीं किया है.
रमेश ने कहा, ‘‘वित्त मंत्री का दावा है कि जीएसटी परिषद की बैठकों में राज्यों ने खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगाने का विरोध नहीं किया. यह राजस्थान के मुख्यमंत्री द्वारा 05.08.2022 को उन्हें (वित्त मंत्री को) लिखा गया एक पत्र है, जो उनके दावे का खंडन करता है.’’ उल्लेखनीय है कि गहलोत ने पांच अगस्त को खाद्य पदार्थों पर जीएसटी की उच्च दर लगाने के फैसले का विरोध करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर अपने फैसले पर पुर्निवचार करने का आग्रह किया था.
कांग्रेस ने आबकारी नीति मामले में सिसोदिया का इस्तीफा मांगा
कांग्रेस ने दिल्ली के आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की छापेमारी के आलोक में रविवार को उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान में मुद्दा शराब नीति का है और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) शिक्षा नीति पर बहस की ‘‘आड़ में छिपना’’ बंद करे.
कांग्रेस ने इस मामले में भाजपा की मिलीभगत का भी आरोप लगाया और दावा किया कि मध्य प्रदेश की एक ‘ब्लैकलिस्ट’ कंपनी जिसे दिल्ली में शराब की दुकानें आवंटित की गई थीं, वह भाजपा की ‘‘प्रमुख दानदाता’’ थी. कांग्रेस ने दावा किया कि भाजपा ने निर्वाचन आयोग के समक्ष किये गए खुलासे में ‘‘इस तरह के चंदे की बात स्वीकार की’’ थी.
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौधरी ने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर सीबीआई की प्राथमिकी में कंपनी का उल्लेख नहीं किया गया है. हम जानना चाहते हैं कि क्यों?’’ चौधरी ने सिसोदिया और उनके कैबिनेट सहयोगी सत्येंद्र जैन दोनों के इस्तीफे की मांग की. जैन को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया है.
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “आप को शिक्षा नीति की बहस के पीछे छिपना बंद करना चाहिए. यहां मूल मुद्दा शराब नीति और यह है कि दिल्ली को कैसे देश की शराब राजधानी में परिर्वितत कर दिया गया.’’ उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों का भाजपा द्वारा इस हद तक दुरुपयोग किया गया है कि उनकी सही कार्रवाई, जैसे कि शराब घोटाले के मामले में है, संदिग्ध लगती है.
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि दिल्ली में जब लोग कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान चिकित्सकीय आॅक्सीजन के अभाव में मर रहे थे तब भाजपा नेता क्या कर रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘आप नयी आबकारी नीति बनाने में व्यस्त थी.’’ चौधरी ने कहा, ‘‘आठ भाजपा विधायक, सात भाजपा सांसद, तीन महापौर चुप क्यों थे? वह कांग्रेस थी जो दिल्ली को शराब की राजधानी बनाने के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रही थी जिसे दिवंगत मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल के दौरान फ्लाईओवर के शहर के तौर पर जाना जाता था.’’ दिल्ली कांग्रेस की नेता अलका लांबा ने सवाल किया कि यदि मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन पाक-साफ हैं तो आप समर्थक उनके साथ एकजुटता दिखाते हुए विरोध प्रदर्शन क्यों नहीं कर रहे हैं.
लांबा ने कहा, “तथ्य यह है कि वे भ्रष्ट हैं. हम पूछना चाहते हैं कि वे अभी भी दिल्ली कैबिनेट में कैसे बने हुए हैं. हम उनका इस्तीफा चाहते हैं.’’ चौधरी ने मध्य प्रदेश स्थित डिस्टिलरी की भूमिका की भी सीबीआई जांच की मांग की और भाजपा पर उक्त ‘ब्लैकलिस्ट’ कंपनी को बचाने का आरोप लगाया क्योंकि वह उसके प्रमुख दानदाताओं में थी. चौधरी ने यह भी कहा कि आप जो पंजाब को नशा से मुक्ति दिलाने गई थी, उसने पूरी दिल्ली में शराब का कारोबार फैला दिया.