सरकार हुर्रियत से कभी बात नहीं करेगी, हम घाटी के युवाओं से बात करेंगे: अमित शाह

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 29 Jul 2025 10:13 PM
सरकार हुर्रियत से कभी बात नहीं करेगी, हम घाटी के युवाओं से बात करेंगे: अमित शाह
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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को ‘आतंकवादी संगठनों का मुखौटा’ करार दिया और कहा कि मोदी सरकार उसके साथ कभी बातचीत नहीं करेगी. शाह ने लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि एक समय था जब हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेताओं के साथ ‘वीआईपी’ जैसा व्यवहार होता था और उनके लिए ‘रेड कार्पेट’ बिछाया जाता था. गृह मंत्री ने कहा कि हुर्रियत नेताओं के साथ सरकार बातचीत करती थी.

उन्होंने कहा, ”मनमोहन सिंह सरकार के प्रतिनिधि उनके साथ बातचीत करते थे. हमने हुर्रियत के सभी घटकों पर प्रतिबंध लगा दिया और सब सलाखों के पीछे हैं. हम हुर्रियत के साथ बात नहीं करना चाहते.” शाह ने कहा, ”मैं नरेन्द्र मोदी सरकार की नीति दोहराना चाहता हूं. हुर्रियत आतंकवादी संगठनों का एक मुखौटा है. हम उनसे बातचीत नहीं करेंगे. हम घाटी के युवाओं से बातचीत करेंगे.” साल 1993 में गठित हुर्रियत, जम्मू कश्मीर स्थित कई अलगाववादी संगठनों का एक समूह है. इसे अपने विचारों, गतिविधियों और राजनीतिक बयानों के कारण पाकिस्तान समर्थक समूह माना जाता रहा है.

पहलगाम में निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वाले आतंकी ढेर किए गए : अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की हत्या करने वाले तीन आतंकवादी ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं. उन्होंने लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा में भाग लेते हुए यह जानकारी दी.

शाह ने कहा, ”मैं सदन के माध्यम से, कल हुए ‘ऑपेरशन महादेव’ की जानकारी पूरे देश को देना चाहता हूं. कल ‘ऑपेरशन महादेव’ में सुलेमान, अफगान और जिब्रान नाम के तीन आतंकवादी…सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त अभियान में मारे गए.” उन्होंने बताया, ”सुलेमान, लश्कर-ए-तैयबा का ए श्रेणी का कमांडर था. पहलगाम और गगनगीर आतंकी हमले में वह लिप्त था, इसके बहुत सारे सबूत हमारी एजेंसियों के पास हैं. अफगान और जिब्रान भी ए श्रेणी के आतंकवादी थे.”

गृह मंत्री ने कहा, ”जिन्होंने पहलगाम की बैसरन घाटी में हमारे निर्दोष नागरिकों को मारा था, उनमें ये तीनों आतंकवादी शामिल थे और कल तीनों ही मारे गए. मैं सेना के पैरा 4, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के सभी जवानों को सदन और पूरे देश की ओर से बहुत-बहुत साधुवाद देता हूं.” गृह मंत्री के अनुसार, बीते 22 अप्रैल को दिन में एक बजे पहलगाम की बैसरन घाटी में हमला हुआ था और वह शाम 5.30 बजे श्रीनगर पहुंच गए थे तथा 23 अप्रैल को एक सुरक्षा बैठक की गई और इसकी पुख्ता व्यवस्था की गई कि नृशंस हत्या करने वाले हत्यारे देश छोड़कर भागने न पाएं.

उन्होंने बताया कि पूरी छानबीन के बाद यह पुष्टि की गई कि इन तीनों आतंकवादियों ने ही 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में 26 निर्दोष लोगों की जान ली थी. गृह मंत्री ने कहा, ”आज मैं सदन को यह बताते हुए बहुत खुश हूं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से आतंकवादियों के आकाओं को जमीन में मिलाने का काम किया था और सेना एवं सीआरपीएफ ने उन आतंकवादियों को भी समाप्त कर दिया.” इस दौरान समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव कुछ सवाल उठाते देखे गए.

शाह ने कटाक्ष करते हुए कहा, ”मुझे अपेक्षा थी कि जब ये (विपक्ष) पहलगाम हमले के आतंकवादियों के मारे जाने की खबर सुनेंगे तो खुशी की लहर दौड़ जाएगी, लेकिन इनके चेहरे तो फीके पड़ गए. यह किस तरह की राजनीति है?” उन्होंने सपा अध्यक्ष का नाम लेते हुए कहा, ”आप आतंकवादियों का धर्म देखकर दुखी मत होइए.” शाह ने इस बात पर जोर दिया, ”ये हमारे देश की सेना, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस, तीनों की साझा तौर पर बहुत बड़ी कामयाबी है. हमें इस पर गर्व होना चाहिए.” उन्होंने कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम के एक बयान का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि चिदंबरम ने पाकिस्तान को क्लीन चिट दी है. शाह ने कहा कि पूर्व गृह मंत्री ने सवाल उठाया है कि आतंकी पाकिस्तान से आए थे, इसके क्या सबूत हैं.

गृह मंत्री ने कहा, ”मैं आज चिदंबरम जी को आपके (आसन के) माध्यम से कहना चाहता हूं कि हमारे पास सबूत हैं कि वे तीनों पाकिस्तानी थे. तीन में से दो की पाकिस्तानी मतदाता संख्या भी हमारे पास उपलब्ध हैं. तीनों की राइफलें भी हैं, उनके पास से जो चॉकलेट मिली है, वह भी पाकिस्तान में बनी है.” उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ”ये कहते हैं कि वे (आतंकवादी) पाकिस्तानी नहीं थे. इसका मतलब है कि देश का एक पूर्व गृह मंत्री पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान को क्लीनचिट दे रहा है.” शाह ने ‘ऑपरेशन महादेव’ के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि 22 मई को आईबी के पास एक ”ूमन इंटेल’ आई और दाचीगाम क्षेत्र के अंदर आतंकियों की उपस्थिति की सूचना मिली.

उन्होंने कहा कि आईबी और सेना ने दाचीगाम में अल्ट्रा सिग्नल कैप्चर करने के लिए 22 मई से 22 जुलाई तक लगातार प्रयास किए  और 22 जुलाई को आतंकियों के वहां होने की पुष्टि हुई. शाह ने कहा कि इसके बाद सेना के पैरा 4 के नेतृत्व में, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों ने एक साथ आतंकवादियों को घेरा और पहलगाम में निर्दोष नागरिकों को मारने वाले तीनों आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया. उन्होंने कहा कि एनआईए के कब्जे में बंद इन आतंकवादियों के हमदर्दों ने इनकी पहचान की है.

शाह ने कहा कि इन आतंकवादियों ने ही पहलगाम हमले को अंजाम दिया, इस बात की पुष्टि के लिए और सबूत जुटाए गए. उन्होंने कहा कि पहलगाम में घटनास्थल से मिले कारतूस के खोखों की एफएसएल रिपोर्ट तैयार की गई थी. शाह ने कहा कि मारे गए आतंकवादियों की तीन राइफल मिलीं जिनमें एक एम9 अमेरिकी राइफल और दो एके 47 राइफलें थीं. गृह मंत्री ने कहा कि इन राइफलों को कल रात विशेष विमान से चंडीगढ. पहुंचाया गया और कारतूसों के खोखों से मिलान करके तय हो गया कि इन्हीं तीन राइफलों से हमारे निर्दोष नागरिक मारे गए. उन्होंने कहा कि एफएसएल ने आज सुबह चार बजे इसकी पुष्टि की है.

उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले की जांच में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने मृतकों के परिजनों, पर्यटकों, खच्चर वालों, फोटोग्राफर, कर्मचारियों आदि कुल मिलाकर 1055 लोगों से तीन हजार घंटे से अधिक पूछताछ की. शाह ने कहा कि इसके आधार पर आतंकियों के स्केच बनाए गए. उन्होंने कहा कि गत 22 जून को बशीर और परवेज नामक दो लोगों की पहचान की गई जिन्होंने हमले के अगले दिन आतंकियों को शरण दी थी. शाह ने कहा कि उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया, दोनों हिरासत में हैं. गृह मंत्री के अनुसार, उन दोनों ने इन आतंकियों की पहचान की.

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