
कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सोमवार को अपने इस बयान पर दृढ़ता से कायम रहीं कि महिलाओं ने कोलकाता में राजभवन में जाने को लेकर भय जताया था. ममता ने मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अन्य नेताओं के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे में एक अंतरिम आदेश के लिए राज्यपाल सी वी आनंद बोस की ओर से कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल याचिका का विरोध भी किया.
बोस ने अपने वकील के माध्यम से बनर्जी, दो नवनिर्वाचित विधायकों और टीएमसी की एक अन्य नेता को राजभवन में कथित घटनाओं के संबंध में आगे कोई टिप्पणी करने से रोकने का अनुरोध किया. इस पर बनर्जी के वकील एस एन मुखर्जी ने न्यायमूर्ति कृष्ण राव के समक्ष दलील दी कि उनकी (ममता) टिप्पणी जनहित के मुद्दों पर एक निष्पक्ष टिप्पणी थी और मानहानिकारक नहीं थी.
मुख्यमंत्री के अपने बयान पर कायम रहने की बात कहते हुए मुखर्जी ने दलील दी कि उन्होंने केवल राजभवन में कुछ कथित गतिविधियों पर महिलाओं की आशंकाओं को दोहराया था. मुखर्जी ने कहा कि वह हलफनामे में उन महिलाओं के नाम बताने को तैयार हैं, जिन्होंने ऐसी आशंका जाहिर की है.
अंतरिम आदेश के अनुरोध पर न्यायमूर्ति राव की अदालत में बहस पूरी हो गई और इस पर आदेश बाद में दिया जाएगा. दो मई को राजभवन में कार्यरत एक संविदा महिला कर्मचारी ने बोस के खिलाफ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था, जिसके बाद कोलकाता पुलिस ने एक जांच शुरू की थी. संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत किसी राज्यपाल के खिलाफ उसके कार्यकाल के दौरान कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती.
बोस की ओर से पेश हुए वकील धीरज त्रिवेदी ने कहा कि यह मुद्दा राज्यपाल द्वारा दो नवनिर्वाचित टीएमसी विधायकों – सायंतिका बनर्जी और रेयात हुसैन सरकार – को राजभवन में शपथ लेने के लिए आमंत्रित करने से शुरू हुआ. त्रिवेदी ने कहा कि दोनों ने विधानसभा अध्यक्ष या राज्यपाल से विधानसभा में शपथ लेने के लिए उन्हें एक पत्र लिखा था. उन्होंने कहा कि इसमें किसी आशंका या भय का उल्लेख नहीं था जैसा कि बाद में कथित तौर पर कहा गया था.
मुख्यमंत्री के अलावा, बोस ने दो विधायकों और टीएमसी नेता कुणाल घोष के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है. मुख्यमंत्री के वकील ने दावा किया कि आवेदन विचार योग्य नहीं है और साथ ही न्यायमूर्ति राव की अदालत के पास मामले की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है. मुखर्जी ने कहा कि दोनों विधायक शपथ कहां लेंगे, इसको लेकर गतिरोध पर उनका बयान भी मानहानिकारक नहीं था.



