सरकार मणिपुर को लेकर उदासीन, जवाब देने से बच रहे हैं प्रधानमंत्री: विपक्ष

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 31 Jul 2023 08:42 PM
सरकार मणिपुर को लेकर उदासीन, जवाब देने से बच रहे हैं प्रधानमंत्री: विपक्ष
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नयी दिल्ली. ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के घटक दलों ने मणिपुर के मुद्दे पर सोमवार को भी संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित रहने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि पूर्वोत्तर के हिंसा प्रभावित राज्य को लेकर सरकार पूरी तरह से उदासीन है तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस मामले पर सदन के भीतर जवाब देने से भाग रहे हैं.

विपक्षी सांसदों ने मानसून सत्र के पिछले कई दिनों की तरह सोमवार को भी लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कराने और राज्यसभा में नियम 267 के तहत मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा तथा प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य की मांग जारी रखी. इसको लेकर गतिरोध बने रहने की वजह से दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल ने संसद में विधायी एजेंडा को आगे बढ.ाने और अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा नहीं होने देने को लेकर सत्ता पक्ष की विपक्ष द्वारा की जा रही आलोचना को खारिज करते हुए सोमवार को कहा कि न तो नियम और न ही परिपाटी सत्तारूढ. दल के लिए पहले बहुमत साबित करना अनिवार्य बनाती है.

केंद्रीय मंत्री गोयल ने संवाददाताओं से कहा कि हर कोई जानता है कि सरकार के पास लोकसभा में दो तिहाई बहुमत है और संख्या बल इसके पक्ष में है. मणिपुर के दौरे से लौटे विपक्ष के सांसदों ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडिया) के घटक दलों के प्रमुख नेताओं को हिंसा प्रभावित राज्य की स्थिति से अवगत कराया. सांसदों के इस प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार मणिपुर की स्थिति को लेकर उदासीन है.

खरगे ने ट्वीट किया, ”मणिपुर उथल-पुथल का सामना कर रहा है लेकिन मोदी सरकार उदासीन दिखी. हमारे ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों ने राज्य का दौरा करने के बाद वहां के लोगों से उनका दर्द सुना जो दिल दहलाने वाला है.” उन्होंने दावा किया, ”चुनावी रैलियों, खुद का प्रचार करने के लिए ट्रेन का उद्घाटन करने और भाजपा की बैठकों में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के पास समय है, लेकिन मणिपुर के लोगों की पीड़ा सुनने और पीड़ा का निदान करने या अंतर-सामुदायिक मुद्दों को हल करने की दिशा में काम करने के लिए उनके पास समय नहीं है.” खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार मणिपुर की स्थिति से निपटने में दिशाहीन प्रतीत होती है, जो संसद में एक व्यापक बयान के अभाव से स्पष्ट है.

विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ के 21 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल 29 जुलाई को हिंसा प्रभावित मणिपुर पहुंचा था. प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर जोर दिया कि अगर मणिपुर में पिछले तीन महीने से जारी जातीय संघर्ष की समस्या को जल्द हल नहीं किया गया, तो देश के लिए सुरक्षा समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ” ‘इंडिया’ के घटक दल आज दोपहर राज्यसभा में अपने रुख पर अड़े रहे कि पिछले 90 दिनों में मणिपुर में जो कुछ हुआ है उस पर प्रधानमंत्री को सदन में एक बयान देना चाहिए, लेकिन उन्होंने चुप्पी साध रखी है. प्रधामंत्री के बयान के बाद चर्चा होनी चाहिए.” उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ की पार्टियां नियम 267 के तहत ऐसा चाहती हैं, जिसका अर्थ है कि उठाए गए मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए बहस खत्म होने तक सदन के अन्य सभी कार्य निलंबित कर दिए जाते हैं.

रमेश ने आरोप लगाया, ” विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की पार्टियां मणिपुर पर चर्चा से भाग नहीं रही हैं. दरअसल, प्रधानमंत्री ही राज्यसभा में बयान देने से भाग रहे हैं.” कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा से भाग रही है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ”60 से अधिक सांसदों ने मणिपुर पर चर्चा के लिए नोटिस दिया था, लेकिन सरकार इससे भाग रही है…प्रधानमंत्री को सदन में आना होगा और इस मुद्दे पर बोलना होगा.” आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने कहा, ”अगर सत्तापक्ष मणिपुर पर चर्चा कराने के लिए प्रतिबद्ध है तो विपक्षी सदस्यों की नोटिस पर अपनी स्वीकृति दीजिए.”

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मणिपुर पर चर्चा नहीं चाहती है. तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने कहा कि प्रधानमंत्री संसद के मानसून सत्र में अब तक 20 सेकेंड के लिए भी सदन में नहीं आए हैं. उन्होंने सवाल किया, ”प्रधानमंत्री सदन में क्यों नहीं आ सकते?” डेरेक ने कहा, ”हम सभी मणिपुर पर चर्चा के लिए तैयार हैं.”

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