घरेलू बिक्री में वृद्धि के कारण GST संग्रह अगस्त में 6.5% बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपये

नयी दिल्ली. घरेलू बिक्री में वृद्धि के कारण अगस्त में सकल जीएसटी संग्रह 6.5 प्रतिशत बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया. सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली. आगामी त्योहारों के कारण राजस्व में वृद्धि जारी रहने की संभावना है.

सकल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह अगस्त 2024 में 1.75 लाख करोड़ रुपये था. पिछले महीने संग्रह 1.96 लाख करोड़ रुपये था.
इस साल अगस्त में सकल घरेलू राजस्व 9.6 प्रतिशत बढ़कर 1.37 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि आयात कर 1.2 प्रतिशत घटकर 49,354 करोड़ रुपये रहा. जीएसटी रिफंड सालाना आधार पर 20 प्रतिशत घटकर 19,359 करोड़ रुपये रह गया. शुद्ध जीएसटी राजस्व अगस्त 2025 में 1.67 लाख करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 10.7 प्रतिशत की वृद्धि है.

ये आंकड़े केंद्र और राज्यों की जीएसटी परिषद की बैठक से ठीक दो दिन पहले जारी किए गए. इस बैठक में दरों को युक्तिसंगत बनाने और कर स्लैब की संख्या कम करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा. ईवाई के कर भागीदार सौरभ अग्रवाल ने कहा कि निर्यात रिफंड में उल्लेखनीय गिरावट से वैश्विक शुल्क के कारण निर्यात क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव का पता चलता है.

अग्रवाल ने कहा, ”प्रतिकूल वैश्विक हालात और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद, मजबूत घरेलू खपत अब तक स्थिर बनी हुई है.” डेलॉइट इंडिया के पार्टनर एम एस मणि ने कहा, ”संग्रह में वृद्धि हाल ही में साझा किए गए जीडीपी आंकड़ों के अनुरूप है और नीति निर्माताओं को इससे जीएसटी सुधारों को आगे बढ़ाने का भरोसा मिलेगा.” इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि जुलाई 2025 में वस्तुओं के आयात में तेज वृद्धि (जो अगस्त 2025 के जीएसटी आंकड़ों में दिखाई देगी) को देखते हुए आयात पर आईजीएसटी में कमी हैरान करने वाली है.

टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी र्सिवसेज एलएलपी के भागीदार विवेक जालान ने कहा, ” सालाना आधार पर शुद्ध जीएसटी राजस्व में 10.7 प्रतिशत की वृद्धि मुख्य रूप से घरेलू और आयात दोनों में जीएसटी रिफंड में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट के कारण हुई है. उन्होंने कहा, ”हालांकि एक तर्क यह हो सकता है कि निर्यात में गिरावट के कारण रिफंड आवेदनों में भारी गिरावट आई है, लेकिन यह असंभव जान पड़ता है क्योंकि सकल राजस्व अभी भी लगभग 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. इसलिए, रिफंड में गिरावट का एक बड़ा कारण जमीनी स्तर पर रिफंड का रुका होना हो सकता है.”

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