हरियाणा महिला आयोग ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के खिलाफ टिप्पणी करने पर एक प्रोफेसर को नोटिस भेजा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 14 May 2025 09:25 PM
हरियाणा महिला आयोग ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के खिलाफ टिप्पणी करने पर एक प्रोफेसर को नोटिस भेजा
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चंडीगढ़/कोल्लम/गुवाहाटी. हरियाणा राज्य महिला आयोग ने एक निजी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के खिलाफ टिप्पणी करने पर नोटिस जारी किया है. आयोग ने प्रोफेसर की टिप्पणी को ‘सशस्त्र बलों में सेवा दे रहीं महिलाओं का अपमान’ और ‘सांप्रदायिक वैमनस्य’ को भड़काने वाला बताया.

यह नोटिस 12 मई का है जिसमें कहा गया है कि आयोग ने सोनीपत में अशोका विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख एवं एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की ओर से ”सात मई को या उसके आसपास” दिए गए ”सार्वजनिक बयानों/टिप्पणियों” का स्वत: संज्ञान लिया है. विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि महमूदाबाद ने यह टिप्पणी ‘व्यक्तिगत हैसियत’ से की है और यह संस्थान की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करती. विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि उसे सशस्त्र बलों पर गर्व है.

पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने छह और सात मई की दरमियानी रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की थी. पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी जिनमें अधिकतर पर्यटक थे. आयोग ने कहा कि ये टिप्पणियां ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संबंध में थीं और इस मामले में महमूदाबाद को आयोग के समक्ष तलब किया गया है.

आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने संवाददाताओं को बताया कि एसोसिएट प्रोफेसर को बुधवार को पैनल के सामने पेश होने के लिए कहा गया था. उन्होंने कहा, ”हमने पूरा दिन इंतजार किया, लेकिन वह नहीं आए. हमें एक ईमेल मिला जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें देर से सूचित किया गया था और इसलिए वह आज नहीं आ सकते.” भाटिया ने कहा, ”हम देश की बेटियों कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को प्रणाम करते हैं. लेकिन राजनीति विज्ञान पढ़ाने वाले प्रोफेसर ने उनके लिए जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया है… मुझे उम्मीद थी कि वह कम से कम आज आयोग के सामने पेश होंगे और खेद व्यक्त करेंगे.”

नोटिस के साथ महमूदाबाद की टिप्पणियों को संलग्न किया गया है. उनमें से एक में प्रोफेसर ने कहा था कि कर्नल सोफिया कुरैशी की सराहना करने वाले दक्षिणपंथी लोगों को भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और संपत्तियों को ”मनमाने ढंग से” गिराए जाने के पीड़ितों के लिए सुरक्षा की मांग करनी चाहिए.

एसोसिएट प्रोफेसर ने कर्नल कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की मीडिया ब्रीफिंग को ”दिखावटी” बताया था. उन्होंने कहा, ”लेकिन दिखावटीपन को जमीनी हकीकत में बदला जाना चाहिए, अन्यथा यह सिर्फ पाखंड है.” आयोग ने कहा कि महमूदाबाद की टिप्पणियों ने ”कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह सहित वर्दी धारण करने वाली महिलाओं के अपमान और भारतीय सशस्त्र बलों में पेशेवर अधिकारियों के रूप में उनकी भूमिका को कमतर आंकने” के संबंध में चिंताएं उत्पन्न की हैं.
विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने पिछले सप्ताह विदेश सचिव विक्रम मिसरी और कर्नल सोफिया कुरैशी के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर मीडिया को जानकारी दी थी.

अशोका विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा, ”किसी संकाय सदस्य द्वारा अपने निजी सोशल मीडिया पेज पर की गई टिप्पणियां विश्वविद्यालय की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं. ये बयान उन्होंने अपनी व्यक्तिगत क्षमता के तहत स्वतंत्र रूप से दिए हैं.” बयान में कहा गया कि अशोका विश्वविद्यालय और अशोका समुदाय के सभी सदस्य भारत के सशस्त्र बलों पर गर्व करते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने की दिशा में उनके कार्यों में उनका स्पष्ट रूप से समर्थन करते हैं. विश्वविद्यालय ने कहा कि वह राष्ट्र और देश की सेनाओं के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है.

आयोग ने कहा कि महमूदाबाद की टिप्पणी तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का खुलासा करती है, जिसमें बार-बार “नरसंहार”, “अमानवीयकरण” और “पाखंड” का उल्लेख किया गया है, जिससे सरकार और सशस्त्र बलों पर दुर्भावनापूर्ण सांप्रदायिक इरादे का आरोप लगाया गया है, साथ ही सांप्रदायिक तनाव को भड़काने और आंतरिक शांति को भंग करने का प्रयास किया गया है.

आयोग इन टिप्पणियों को सीमा पार आतंकवाद के जवाब में सैन्य कार्रवाइयों और महिला अधिकारियों की भूमिका को बदनाम करने, अशांति को भड़काने, विशेष रूप से सांप्रदायिक सद्भाव को निशाना बनाने और राष्ट्रीय अखंडता को कमजोर करने के प्रयासों के रूप में देखता है. नोटिस में कहा गया है कि टिप्पणियां विश्वविद्यालय के संकाय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) विनियम 2018 से अपेक्षित नैतिक व्यवहार का उल्लंघन हैं.

सोशल मीडिया पर कथित राष्ट्र-विरोधी टिप्पणी को लेकर टीवी अभिनेता अखिल मरार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

केरल पुलिस ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में कथित रूप से राष्ट्र-विरोधी टिप्पणी करने पर मलयालम टेलीविजन हस्ती और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अखिल मरार के खिलाफ मामला दर्ज किया है. कोट्टारक्कारा थाने के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य) के तहत दर्ज किया गया है जो गैर-जमानती है.

कोट्टारक्कारा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय नेता अनीश किड़क्केकारा ने शिकायत दर्ज कराई थी. अपनी शिकायत में, उन्होंने आरोप लगाया कि मरार के वीडियो में राष्ट्र के खिलाफ टिप्पणी की गई हैं. पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है.
उन्होंने बताया कि चूंकि वीडियो हटा दिया गया है, इसलिए आगे की कार्यवाही करने से पहले उसे फिर से हासिल करना होगा.

पहलगाम हमले में पाकिस्तान की भूमिका का ”बचाव” करने के आरोप में दो और लोग गिरफ्तार

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के मद्देनजर ”पाकिस्तान के साथ सहानुभूति रखने” के आरोप में असम में दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या 58 हो गई है. शर्मा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि गिरफ्तार किए गए दोनों लोग सोनितपुर जिले के हैं.

उन्होंने मंगलवार को कहा, ”58 पाक समर्थक सलाखों के पीछे हैं.” शर्मा ने कहा कि ”देशद्रोहियों” के खिलाफ राज्यव्यापी कार्रवाई जारी रहेगी और ”किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.” मुख्यमंत्री ने पिछले सप्ताह यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के प्रावधान के तहत कार्रवाई की जाएगी. इससे पहले, एआईयूडीएफ के विधायक अमीनुल इस्लाम को पहलगाम हमले में पाकिस्तान की भूमिका का ”बचाव” करने के लिए देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

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