नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को सर्वदलीय बैठक में बताया कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अभी सदमे में हैं और भारत ने उन्हें मदद का भरोसा दिलाते हुए आगे की रणनीति तय करने के लिए समय दिया है. सूत्रों ने यह जानकारी दी.
सूत्रों ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में जयशंकर ने कहा कि हसीना को भारत आए अभी चौबीस घंटे भी नहीं बीते हैं और वह सदमे में हैं. विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार हसीना को सदमे से उबरने के लिए समय दे रही है और इसके बाद वह उनकी आगे की रणनीति सहित अन्य मुद्दों पर उनसे बात करेगी.
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के कई नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार को पूर्ण सहयोग देने की बात कही. वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेता वी विजयसाई रेड्डी ने कहा कि उनकी पार्टी देशहित में सरकार के साथ है. बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री हसीना के अचानक इस्तीफा देने और देश छोड़ने से वहां अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई. हसीना सोमवार रात बांग्लादेशी वायुसेना के एक सी-130 जे सैन्य विमान से भारत पहुंचीं. बताया जा रहा है कि उनकी लंदन जाने की योजना है.
सूत्रों के मुताबिक, संसद भवन में राजनीतिक दलों के नेताओं को बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत पड़ोसी देश में मौजूद 10 हजार से अधिक भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेशी सेना के संपर्क में है. सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित अन्य नेताओं के सवालों के जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने बांग्लादेश के मौजूदा हालात में विदेशी सरकारों की भूमिका से इनकार नहीं किया, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि हालात बहुत संवेदनशील हैं और सरकार पड़ोसी देश के घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रही है.
सूत्रों ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में राहुल ने पूछा कि क्या बांग्लादेश में संकट को तूल देने में विदेशी सरकारों का हाथ रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में जयशंकर ने कहा कि बांग्लादेश में प्रदर्शनकारियों ने अल्पसंख्यकों के घरों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया.
बैठक के बाद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आज संसद में एक सर्वदलीय बैठक में बांग्लादेश के हालिया घटनाक्रमों के बारे में जानकारी दी. इस दौरान जताए गए सर्वसम्मत समर्थन और तालमेल के लिए सभी दलों की सराहना करता हूं.” कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में सरकार ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी. उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “जहां तक ??राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हित का सवाल है, कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से सरकार के साथ है.” हालांकि, कार्ति बैठक में मौजूद नहीं थे.
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने बैठक में कहा कि बांग्लादेश के घटनाक्रम के बारे में पश्चिम बंगाल सरकार को अवगत कराया जाना चाहिए, क्योंकि अभी तक उससे संपर्क नहीं किया गया है. टीएमसी नेता डेरेक ओब्रायन ने संवाददाताओं से कहा कि बांग्लादेश की सीमा से लगा राज्य होने के कारण, पश्चिम बंगाल पर वहां किसी भी संकट का सबसे अधिक असर पड़ने की संभावना है. हालांकि, ब्रायन बैठक में मौजूद नहीं थे.
बैठक में मौजूद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की नेता मीसा भारती ने कहा कि बैठक में, बांग्लादेश में भारतीयों के बारे में चिंता जताई गई और सरकार से सीमाओं को सुरक्षित करने को कहा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पड़ोसी देश में अशांति से भारत पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.
सर्वदलीय बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा, जनता दल (यूनाइटेड) के नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ‘लल्लन’, केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के टी आर बालू, समाजवादी पार्टी (सपा) के रामगोपाल यादव, तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सुप्रिया सुले सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया.
बैठक से पहले, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने कहा था कि भारत में सत्ता में मौजूद लोगों को बांग्लादेश के घटनाक्रम से सबक लेना चाहिए. उन्होंने कहा, “जब लोकतंत्र पर खतरा मंडराता है और सत्ता में बैठे लोग लोकतंत्र का मुखौटा पहनकर तानाशाह बन जाते हैं, तो देश की जनता कुछ समय तक ही उन्हें बर्दाश्त करती है और फिर अराजकता फैल जाती है.” मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पी संतोष कुमार ने कहा कि बांग्लादेश में स्थिति बहुत संवेदनशील है.
उन्होंने कहा, “हम बांग्लादेश के लोगों के साथ हैं, जमात-ए-इस्लामी, सेना या शेख हसीना के साथ नहीं. हम बांग्लादेश के छात्रों के साथ हैं. सभी निरंकुश शासकों का यही अंजाम होता है.” सपा नेता वीरेंद्र सिंह ने कहा कि बांग्लादेश की स्थिति उन सभी देशों के लिए एक संदेश है, जो लोगों की आवाज नहीं सुनते हैं.
उन्होंने कहा, “जिन देशों में लोकतंत्र को खत्म करने और तानाशाही लाने की कोशिशें होती हैं, वहां ऐसे ही हालात पनपते हैं. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.” भाजपा के राज्यसभा सदस्य लहर सिंह सिरोया ने कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं. उन्होंने कहा, “वे जरूरी कदम उठा रहे होंगे. हमारा देश इस मुद्दे से निपटने में सक्षम है.”