उच्च न्यायालय ने गौतम गंभीर को अंतरिम राहत दी, धोखाधड़ी के मामले में उनके खिलाफ आदेश पर लगाई रोक

नयी दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को आदेश दिया कि धोखाधड़ी के एक मामले में पूर्व क्रिकेटर और भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गौतम गंभीर के खिलाफ कार्यवाही पर रोक रहेगी. न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने सत्र अदालत के एक फैसले को चुनौती देने वाली गंभीर की याचिका पर अंतरिम आदेश पारित किया.

सत्र अदालत ने मामले में गंभीर को बरी करने के एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया था. मामला कुछ घर खरीदारों से कथित धोखाधड़ी से संबंधित है. गंभीर को राहत देते हुए उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका पर दिल्ली पुलिस से भी जवाब मांगा और अगली सुनवाई की खातिर मामले को 31 जनवरी, 2025 के लिए सूचीबद्ध कर दिया. न्यायाधीश ने कहा, ”इस बीच, याचिकाकर्ता के खिलाफ उक्त आदेश पर रोक रहेगी.” उन्होंने कहा कि अदालत विस्तृत आदेश पारित करेगी. गंभीर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अधिवक्ता पारितोष बुद्धिराजा ने पक्ष रखा.

सत्र अदालत ने 29 अक्टूबर के आदेश में कहा था कि मजिस्ट्रेट अदालत का फैसला गंभीर के खिलाफ आरोपों पर निर्णय लेने में ‘उचित तरीके से विवेक का इस्तेमाल नहीं करना’ दर्शाता है. उसने कहा था, ”आरोपों को देखते हुए गौतम गंभीर की भूमिका में और जांच की जरूरत है.” रियल इस्टेट कंपनियों रुद्र बिल्डवेल रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड, एच आर इन्फ्रासिटी प्राइवेट लिमिटेड, यूएम आर्किटेक्चर्स और कांट्रेक्टर्स लिमिटेड तथा गंभीर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था. गंभीर कंपनियों के संयुक्त उपक्रम के निदेशक और ब्रांड अंबेसेडर थे.

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