हिमाचल की ‘जेन जेड’ संस्कृति की संरक्षक है, विदेशियों से अलग है: राज्यपाल

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 02 Oct 2025 10:47 PM
हिमाचल की ‘जेन जेड’ संस्कृति की संरक्षक है, विदेशियों से अलग है: राज्यपाल
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शिमला. हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने बृहस्पतिवार को राज्य की ‘जेन जेड’ पीढ.ी के लोगों की प्रशंसा की और कहा कि वे दूसरे देशों की ‘जेन जेड’ से अलग होते हैं, क्योंकि वे परंपराओं से जुड़े रहते हैं और विरासत के संरक्षक होते हैं. जेन जेड का इस्तेमाल जनरेशन जेड यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ.ी के लिए किया जाता है.

कुल्लू शहर के रथ मैदान में सप्ताह भर चलने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा समारोह का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल ने भगवान रघुनाथ की पारंपरिक रथ यात्रा में भाग लिया और कहा, ”हिमाचल के ‘जेन जेड’ और दूसरे देशों की जेन जेड के बीच अंतर यह है कि हिमाचल में, जेन-जेड भगवान रघुनाथ जी के रथ को खींचती है, जिससे हमारी संस्कृति आगे बढ.ती है.” कुल्लू में दशहरा अनोखे ढंग से मनाया जाता है. यह तब दशहरा शुरू होता है, जब भारत के बाकी हिस्सों में त्योहार समाप्त हो जाता है. इसमें आसपास के गांवों से 300 से ज़्यादा देवी-देवताओं की भव्य शोभायात्रा और समागम होता है. इसकी शुरुआत कुल्लू घाटी के आराध्य देवता भगवान रघुनाथ के आगमन से होती है.

शुक्ला ने हिमाचल को नशामुक्त राज्य बनाने के लिए सभी देवी-देवताओं से आशीर्वाद की प्रार्थना की और समाज से इस बुराई को खत्म करने के लिए सामूहिक रूप से आगे आने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, ”देवभूमि हिमाचल में नशे के लिए कोई जगह नहीं है. हमें मिलकर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण बनाना होगा.”

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