बांग्लादेश में ईशनिंदा के आरोप में हिंदू व्यक्ति की पीटकर हत्या

ढाका/नयी दिल्ली/कोलकाता. बांग्लादेश में ईशनिंदा के आरोप में हिंदू समुदाय के एक व्यक्ति की पीटकर हत्या कर दी गई और उसके शव को आग लगा दी गई. यह देश में धार्मिक अल्पसंख्यक के खिलाफ हिंसा की नवीनतम घटना है. ‘बांग्ला ट्रिब्यून’ समाचार पोर्टल के अनुसार मृत व्यक्ति की पहचान दीपू चंद्र दास (25) के रूप में हुई, जो मैमनसिंह शहर में एक कारखाने में काम करते थे.

अंतरिम सरकार ने शुक्रवार को एक बयान में मैमनसिंह शहर में हिंदू समुदाय के व्यक्ति की पीटकर हत्या किये जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है. सरकार ने कहा, “इस जघन्य अपराध के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.” पुलिस ने बताया कि दास को पहले बृहस्पतिवार रात कारखाने के बाहर भीड़ ने ईशनिंदा के आरोपों को लेकर पीटा और फिर एक पेड़ से लटका दिया.

भालुका मॉडल थाने के निरीक्षक (जांच) अब्दुल मलिक ने समाचार पोर्टल को बताया, “घटना के बाद, आक्रोशित भीड़ ने मृत व्यक्ति के शव को ढाका-मैमनसिंह राजमार्ग के किनारे छोड़ दिया और उसे आग लगा दी. इससे राजमार्ग के दोनों ओर यातायात अवरूद्ध हो गया.” पुलिस ने शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर भेज दिया. मलिक ने बताया कि इस घटना से इलाके में तनाव फैल गया और पुलिस स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रही है. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा, “हम हिंसा, धमकी, आगजनी और संपत्ति को नष्ट करने के सभी कृत्यों की कड़ी निंदा करते हैं.” सरकार ने कहा, “इस नाजुक घड़ी में, हम प्रत्येक नागरिक से हिंसा, उकसावे और नफरत को खारिज करके हादी को याद करने का आह्वान करते हैं.” ढाका में नकाबपोश बंदूकधारियों के हमले के छह दिन बाद जुलाई विद्रोह के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के संदर्भ में यह बात कही गई. पिछले साल अगस्त में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से अपदस्थ होने के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ कई घटनाओं के कारण हिंदू आबादी प्रभावित हुई है.

बांग्लादेश उच्चायोग की सुरक्षा कड़ी की गयी

बांग्लादेश के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद पड़ोसी मुल्क में हुए हिंसक प्रदर्शनों के मद्देनजर नयी दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस द्वारा टेलीविजन पर प्रसारित संबोधन में हादी की मौत की पुष्टि किये जाने के बाद वहां तनाव फैल गया. इसके बाद बृहस्पतिवार रात को वहां प्रदर्शन किये गये और इस दौरान हमले और तोड़फोड़ की गई. अधिकारी ने बताया, “हमने बृहस्पतिवार रात को बांग्लादेश उच्चायोग की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है. किसी को भी कानून-व्यवस्था भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.”

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने लोगों से सभी प्रकार की हिंसा से दूर रहने का किया आह्वान

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने शुक्रवार को अपने नागरिकों से ‘कुछ असामाजिक तत्वों’ द्वारा की गयी हिंसा से दूर रहने का आह्वान किया है. इससे पहले हाल में यहां नकाबपोश बंदूकधारियों द्वारा गोली मारे जाने के छह दिन बाद एक प्रमुख युवा नेता की मौत हो गयी थी. जुलाई में सरकार के विरूद्ध हुई हिंसक प्रदर्शनों में यह एक प्रमुख नेता था.

मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने एक बयान में एक हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर कर दी गयी हत्या की भी कड़ी निंदा की. उसने कहा कि नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है. उसने कहा,”इस जघन्य अपराध के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.” ‘बांग्ला ट्रिब्यून’ समाचार पोर्टल ने खबर दी है कि मेमनसिंह शहर में बृहस्पतिवार को कथित ईशनिंदा के आरोप में दीपूचंद्र दास नामक एक हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और उसके शव को आग लगा दी गई.

मुख्य सलाहकार की प्रेस शाखा द्वारा जारी बयान में कहा गया है, ”हम हिंसा, धमकी, आगजनी और संपत्ति को नष्ट करने के सभी कृत्यों की कड़ी और स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं.” बयान में कहा गया है, ”इस नाजुक घड़ी में, हम हर नागरिक से हिंसा, उकसावे और नफरत को अस्वीकार करके और उनका विरोध करके हादी (जुलाई के विद्रोह का एक प्रमुख नेता) का सम्मान करने का आ”ान करते हैं.” हालांकि आज हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई, लेकिन बृहस्पतिवार रात प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के संस्थापक पिता शेख मुजीबुर रहमान के आवास, 32 धानमंडी की पहले से ही ध्वस्त इमारत में तोड़फोड़ की और ढाका में दो प्रमुख मीडिया संस्थानों के कार्यालयों पर हमला किया.

प्रदर्शनकारियों ने चट्टगांव में सहायक भारतीय उच्चायुक्त के आवास पर ईंट और पत्थर भी फेंके, लेकिन वे कोई नुकसान पहुंचाने में असफल रहे. पुलिस ने आंसू गैस छोड़कर और लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया एवं 12 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया.
बयान में कहा गया, ”यह हमारे राष्ट्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण क्षण है जब हम एक ऐतिहासिक लोकतांत्रिक परिवर्तन से गुजर रहे हैं. हम कुछ उन लोगों को इसे पटरी से उतारने नहीं दे सकते जो अराजकता पर पनपते हैं और शांति को नकारते हैं. हमें ऐसा करने भी नहीं देना चाहिए. ” अंतरिम सरकार ने बृहस्पतिवार रात मीडिया संस्थानों पर हुए हमले की भी निंदा की.

उसने कहा कि मीडिया संस्थानों पर हमला “स्वतंत्र मीडिया पर हमले के समान है”. उस यह भी कहा कि इस घटना ने देश की लोकतांत्रिक प्रगति और स्वतंत्र पत्रकारिता के मार्ग में एक बड़ी बाधा उत्पन्न कर दी है. अंतरिम सरकार ने कहा, ”डेली स्टार, प्रोथोम आलो और न्यू एज के पत्रकारो. हम आपके साथ खड़े हैं. आप के साथ किये गये आतंकी कृत्य और हिंसा के लिए हमें गहरा खेद है. राष्ट्र ने आतंक के सामने आपके साहस और सहनशीलता को देखा है. पत्रकारों पर हमले स्वयं सत्य पर हमले हैं. हम आपको पूर्ण न्याय दिलाने का वादा करते हैं.”

उसने कहा कि आगामी चुनाव और जनमत संग्रह महज राजनीतिक कवायद नहीं हैं, बल्कि ”एक गंभीर राष्ट्रीय प्रतिबद्धता हैं.” अगले साल 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव में उम्मीदवार हादी की छह दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गयी. हादी पिछले साल के उन विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख नेताओं में से एक थे, जिन्हें जुलाई विद्रोह का नाम दिया गया था . इस विद्रोह के चलते शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से अपदस्थ हो गयी थी.

बांग्लादेश में हालात के पीछे कट्टरपंथियों का हाथ: समिक भट्टाचार्य

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने शुक्रवार को बांग्लादेश की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पड़ोसी देश में ‘घटनाक्रम के पीछे कट्टरपंथियों का हाथ है’. उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि स्थिति पर उनका नियंत्रण है. भट्टाचार्य ने कहा कि केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय स्थिति से उचित ढंग से निपट रहे हैं तथा वे उसी अनुरूप जवाब देंगे.

राज्यसभा सदस्य ने संवाददाता सम्मेलन में बांग्लादेश की स्थिति से संबंधित प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा, “बांग्लादेश में कट्टरपंथ और चरमपंथ कैंसर की तरह फैल रहा है. सभी सही सोच वाले लोगों को इस खतरे से लड़ने के लिए एकजुट होना चाहिए.” उन्होंने कहा,”1980 के दशक से ही बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतें अपनी जड़ें फैला रही हैं. यह हदें पार कर चुकी हैं. जैसा कि कल रात देखा गया, स्वतंत्र विचारक और उदारवादी व्यक्ति भी हमलों का शिकार हो रहे हैं. पूरी दुनिया कट्टरपंथ का खामियाजा भुगत रही है. एक राष्ट्रवादी सरकार और पार्टी ही इन चुनौतियों का सामना कर सकती है.”

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