
श्रीनगर. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल होने को लेकर उनकी उम्मीदें धूमिल होती जा रही हैं क्योंकि यह मुद्दा लंबा खिंच रहा है. यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि अगर राज्य का दर्जा बहाल नहीं हुआ तो उनका अगला कदम क्या होगा, अब्दुल्ला ने कहा, ”पहले उस मुद्दे पर आते हैं. फिर हम बात करेंगे.” मुख्यमंत्री ने उस रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि यदि एक निश्चित समय सीमा के भीतर जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया गया तो वह इस्तीफा दे देंगे.
उन्होंने कहा, ”मैं इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा. मुझे इस बारे में और कुछ नहीं कहना है. साक्षात्कार लेने वाली ने मुझसे इस बारे में सवाल पूछने की कोशिश की थी. अगर मैंने उन्हें जवाब नहीं दिया, तो आपको क्या लगता है कि मैं आपको जवाब दूंगा?” अब्दुल्ला ने कहा, ”मुझे पहले दिन से ही (राज्य का दर्जा बहाल होने की) उम्मीद थी, लेकिन वह उम्मीद कम होती जा रही है. लेकिन यह मुद्दा जितना लंबा खिंचेगा, उम्मीदें उतनी ही कम होती जाएंगी. आप हमें जितना इंतजार करवाएंगे, हमारी उम्मीदें उतनी ही कम होती जाएंगी.” हालांकि, मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा.
उन्होंने कहा, ”अभी भी कुछ उम्मीद बाकी है. अगर यह इसी उम्मीद के साथ होता है, तो बेहतर होगा.” एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर केंद्र शासित प्रदेश के शासन में कोई बाधा न हो, तो हर राज्य इसकी मांग करेगा. मुख्यमंत्री ने कहा, ”कुछ मुद्दे सामने आते हैं. विभाग मेरे अधीन है और मुझे सदन में जवाब देना होता है, लेकिन विभाग में अधिकारी मेरी पसंद के नहीं हैं. ऐसे कई उदाहरण हैं. कई संस्थाएं ऐसी हैं जो जनता द्वारा चुनी गई सरकार के नियंत्रण में होने चाहिए थे, लेकिन अभी भी हमारे पास नहीं हैं.” आम आदमी पार्टी (आप) विधायक मेहराज मलिक पर जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) लगाए जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि यह अनुचित है.
मुख्यमंत्री ने पूछा, ”मैं अब भी यही मानता हूं कि मेहराज मलिक ने जो कुछ भी किया, उसके लिए पीएसए लगाना जरूरी नहीं था.” अनंतनाग-राजौरी से लोकसभा सदस्य मियां अल्ताफ अहमद द्वारा उनकी सरकार की आलोचना पर, मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पार्टी के अपने वरिष्ठ सहयोगी की सलाह का सम्मान करते हैं.
उन्होंने कहा, ”मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं. वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता हैं. उनका बयान पढ.ने के बाद, मैंने उनसे फोन पर बात की. उन्होंने कहा कि जिस कुर्सी पर मैं बैठा हूं, वहां से मुझे सोच-समझकर बयान देना चाहिए. मेरे पिता भी यही कहते हैं. इस तरह, मेरे पिता और मियां साहब में कोई अंतर नहीं है, और मैं उन्हें पितातुल्य मानता हूं. वह मेरे वरिष्ठ सहयोगी हैं.”



